रूस से तेल मंगाना बंद करेंगी भारतीय कंपनियां? अमेरिकी प्रतिबंध के बाद ऊर्जा सुरक्षा को लेकर गहराया संकट

देश | दुनिया के तीसरे सबसे बड़े कच्चे तेल आयातक देश भारत के सामने एक नया आर्थिक और भू-राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है। अमेरिकी संसद में हाल ही में पारित हुए ‘रूस प्रतिबंध विधेयक’ के प्रभावस्वरूप भारतीय रिफाइनरियां रूस से कच्चे तेल की खरीद में कटौती करने पर विचार कर रही हैं। यदि यह आयात पूरी तरह बंद या बेहद सीमित होता है, तो भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर गहरा असर पड़ सकता है।

अमेरिका का नया कानून और 100% टैरिफ का प्रावधान

पिछले हफ्ते अमेरिकी संसद में एक कड़ा विधेयक पारित किया गया है, जिसमें रूस से कच्चा तेल या ऊर्जा उत्पाद खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ (शुल्क) लगाने का प्रावधान किया गया है। इसके तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार मिल गया है कि वे रूसी तेल के खरीदार देशों पर कड़े प्रतिबंध और शुल्क लगा सकें। इस सूची में भारत का नाम भी शामिल होने के कारण भारतीय कंपनियों पर अमेरिकी दबाव बढ़ गया है।

भारत कितना तेल आयात कर रहा है और अब क्या स्थिति है?

ईरान संघर्ष और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं के बाद भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रूसी तेल पर अपनी निर्भरता काफी बढ़ा ली थी, जो कुल आयात का लगभग 50% तक पहुंच गई थी।

हालांकि, न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच भारतीय रिफाइनरियों ने रूस से खरीद कम करनी शुरू कर दी है:

  • घटता आयात: ऊर्जा डेटा एनालिटिक्स फर्म ‘केप्लर’ के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर महीने में रूस से भारत का तेल आयात घटकर औसतन करीब 19 लाख बैरल रोजाना रह गया है, जो कुल आयात का 35% से अधिक है। यह अप्रैल के बाद से सबसे निचला स्तर है।

रूस के विकल्प तलाशना क्यों है चुनौतीपूर्ण?

विशेषज्ञों का मानना है कि रूस से आने वाले तेल की भरपाई करना भारत के लिए आसान नहीं होगा, क्योंकि:

  1. मात्रा का अंतर: वेनेजुएला या ईरान जैसे अन्य प्रतिबंधित या सीमित देशों की तुलना में रूस से मिलने वाले तेल की मात्रा बहुत अधिक थी।

  2. ऊंची कीमतें: हाल ही में भारत को डिलीवर किए गए रूसी कच्चे तेल की प्रभावी कीमत लगभग 133 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी, जबकि ओमान और मध्य पूर्व (Middle East) के अन्य देशों से मिलने वाला तेल इसके मुकाबले काफी महंगा है।

यदि भारतीय कंपनियां रूसी तेल से पूरी तरह किनारा करती हैं, तो देश में ईंधन की कीमतों और समग्र आयात बिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ना तय है।

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