नई दिल्ली | भारत को अपनी विशाल युवा आबादी पर गर्व है, लेकिन सांख्यिकी मंत्रालय (Ministry of Statistics) की एक ताजा रिपोर्ट ने देश की चिंताएं बढ़ा दी हैं। सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा जारी ‘Periodic Labour Force Survey’ (PLFS) की रिपोर्ट के मुताबिक, देश के करीब 250 जिलों में 15 से 29 वर्ष की आयु के कम से कम 25 फीसदी युवा पूरी तरह से खाली हैं। यानी न तो वे रोजगार में हैं, न ही पढ़ाई कर रहे हैं और न ही किसी प्रकार की स्किल ट्रेनिंग से जुड़े हैं।
क्या है ‘NEET’ कैटेगरी?
सर्वे में इस विशेष श्रेणी के युवाओं को दर्शाने के लिए NEET (Not in employment, Education or Training) टर्म का इस्तेमाल किया गया है। इसका मतलब है कि ऐसे युवा जो न तो नौकरी कर रहे हैं, न शिक्षा ले रहे हैं और न ही किसी ट्रेनिंग प्रोग्राम का हिस्सा हैं।
सालाना जिला स्तर पर कराए गए इस सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि उत्तर भारत के राज्यों—विशेषकर बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और पश्चिम बंगाल—के लगभग दो-तिहाई जिलों में हर 4 में से एक युवा इस ‘NEET’ कैटेगरी में आता है। दक्षिण और पूर्वोत्तर राज्यों का भी कमोबेश यही हाल है; आंध्र प्रदेश, ओडिशा, असम और तेलंगाना के लगभग आधे जिलों में भी यही स्थिति बनी हुई है। इससे पहले नीति आयोग की एक रिपोर्ट में भी देश भर में करीब 9 करोड़ ऐसे युवाओं के बेरोजगार होने की बात सामने आई थी, जो पढ़ाई भी नहीं कर रहे हैं।
महिलाओं की स्थिति और घरेलू कामों का बोझ
रिपोर्ट के अनुसार, इस स्थिति के पीछे कई सामाजिक और आर्थिक वजहें हैं। इनमें एक बड़ा कारण युवाओं द्वारा नौकरी की तलाश बंद कर देना (पसंद का रोजगार न मिलना) या लंबे समय तक सरकारी नौकरियों की तैयारी में जुटे रहना है।
इसके अलावा, सबसे बड़ी चिंताजनक बात महिलाओं से जुड़ी है। सर्वे में शामिल लगभग तीन-चौथाई जिलों में 25 फीसदी से अधिक युवा महिलाएं NEET कैटेगरी में पाई गईं। इसके पीछे मुख्य वजह बिना किसी मेहनताने (Unpaid) के घरेलू कामों की जिम्मेदारी होना है, जो आज भी महिलाओं की उच्च शिक्षा और रोजगार के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है।
कुछ जिलों से आई राहत भरी खबरें
देशभर के निराशाजनक आंकड़ों के बीच कुछ जिलों से थोड़ी राहत देने वाली तस्वीरें भी सामने आई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, देश के लगभग 25 जिलों में NEET युवाओं की संख्या 10 फीसदी से भी कम दर्ज की गई है:
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छत्तीसगढ़: कबीरधाम, राजनांदगांव और उत्तर बस्तर कांकेर
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हिमाचल प्रदेश: चंबा
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केरल: एर्नाकुलम
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मध्य प्रदेश: मंडला
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ओडिशा: नबरंगपुर (यहाँ NEET युवाओं की दर सबसे कम 4.1 फीसदी दर्ज की गई है)
मंत्रालय द्वारा कराए गए इस व्यापक सर्वे में बड़े राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के करीब 600 जिलों को शामिल किया गया था, जिसके आंकड़े देश की रोजगार और शिक्षा नीतियों के लिए एक गंभीर सबक पेश करते हैं।