सिमगा | नगर में सृजन, शिल्प और निर्माण के देवता भगवान श्री विश्वकर्मा की जयंती का पर्व अत्यंत हर्षोल्लास और पारंपरिक श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर शहर के विभिन्न स्थानों और निर्माण स्थलों पर भगवान विश्वकर्मा की विधिवत पूजा-अर्चना की गई, जहाँ बड़ी संख्या में ठेकेदारों, राजमिस्त्रियों, कारीगरों और निर्माण कार्यों से जुड़े श्रमवीरों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
उपकरणों और मशीनों की हुई पूजा, सुख-समृद्धि की कामना
सुबह से ही शहर के विभिन्न पूजा स्थलों और कार्यशालाओं में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। विधि-विधान से हवन-पूजन कर भगवान विश्वकर्मा का आशीर्वाद लिया गया और उपस्थित जनों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। इस विशेष पर्व पर निर्माण कार्यों में उपयोग होने वाले औजारों, वाहनों, मशीनों और अन्य उपकरणों की भी रोली-चंदन और पुष्प से पूजा की गई।
श्रद्धालुओं और कारीगरों ने भगवान विश्वकर्मा से अपने व्यवसाय में निरंतर तरक्की, परिवार में सुख-शांति और पूरे क्षेत्र की समृद्धि की कामना की।
सृजन और निर्माण के देवता के प्रति अटूट आस्था
इस दौरान स्थानीय ठेकेदारों और राजमिस्त्रियों ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा को ब्रह्मांड का पहला शिल्पी और निर्माण का देवता माना जाता है। उनके आशीर्वाद और प्रेरणा से ही हर प्रकार के निर्माण कार्य को गति मिलती है। पर्व के पूरे दिन सिमगा और आसपास के ग्रामीण अंचल में भी भक्तिमय और उत्साहपूर्ण माहौल बना रहा।