रायपुर | छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कवर्धा जिले के दूरस्थ विशेष जनजातीय क्षेत्र बैरख का दौरा कर ‘बाल चौपाल 2.0’ का आयोजन किया। इस दौरान उन्होंने बच्चों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा शिक्षा, स्वास्थ्य और बाल अधिकारों की स्थिति की समीक्षा की। दौरे के दौरान उन्होंने एकलव्य आवासीय विद्यालय में विद्यार्थियों के साथ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन भी मनाया।
बाल चौपाल और बच्चों के साथ संवाद
-
रोचक माध्यमों से जागरूकता: बैरख में आयोजित चौपाल में क्विज और बाल अधिकारों पर आधारित ‘सांप-सीढ़ी’ जैसे खेलों के जरिए बच्चों को उनके अधिकारों, गुड टच-बैड टच, चाइल्ड हेल्पलाइन और बाल विवाह के प्रति जागरूक किया गया।
-
डिजिटल शिक्षा पर जोर: डॉ. शर्मा ने कहा कि जनजातीय अंचल के बच्चे प्रतिभाशाली हैं, जिन्हें डिजिटल संसाधनों और आधुनिक तकनीकी शिक्षा से जोड़कर उनके भविष्य को और बेहतर बनाया जा सकता है।
संस्थानों का निरीक्षण और सख्त निर्देश
दौरे के दौरान आदिवासी बालक आश्रम बैरख और विभिन्न संस्थानों के निरीक्षण में साफ-सफाई, भंडार गृह, शिक्षकों की कमी और मलेरिया से बचाव जैसी व्यवस्थाओं में कमियां पाई गईं। इस पर डॉ. शर्मा ने अधिकारियों को तत्काल निम्नलिखित निर्देश दिए:
-
मलेरिया से बचाव के लिए छात्रों को तुरंत नई मच्छरदानियां उपलब्ध कराई जाएं।
-
हाई स्कूल में विज्ञान के उपकरणों की कमी दूर की जाए।
-
स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति तक गणित, अंग्रेजी और विज्ञान विषयों के लिए अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
-
शासकीय बालक गृह कवर्धा के निरीक्षण के दौरान उन्होंने बच्चों के साथ रात्रि भोजन किया और एक बच्चे का जन्मदिन भी मनाया।
प्रशासनिक समीक्षा बैठक और प्रमुख निर्देश
कलेक्टर सभागृह में आयोजित समीक्षा बैठक में बाल अधिकारों और विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन पर चर्चा की गई:
-
COTPA और बाल श्रम अधिनियम: संबंधित विभागों को इनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए निरंतर अभियान चलाने को कहा गया।
-
मातृ एवं शिशु कल्याण योजनाएं: महिला एवं बाल विकास और श्रम विभाग को प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) और मिनीमाता महतारी जतन योजना का लाभ पात्र हितग्राहियों तक अधिक से अधिक पहुंचाने के निर्देश दिए गए।