मुंबई | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्कूल के साथी रहे 81 वर्षीय असगर अली वोरा द्वारा जमीन पर कब्जे की शिकायत किए जाने के बाद मात्र आठ दिनों के भीतर बड़ा एक्शन सामने आया है। महाराष्ट्र के ठाणे जिले के मीरा-भायंदर इलाके में विवादित जमीन को लेकर घिरे बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता ने आखिरकार उस जमीन का कब्जा छोड़ने और कंस्ट्रक्शन की मंजूरी सरेंडर करने का ऐलान कर दिया है।
इस पूरे मामले के मुख्य बिंदु:
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क्या था मामला: पीएम मोदी के बचपन के दोस्त असगर अली वोरा का आरोप था कि भायंदर ईस्ट के नवघर इलाके में उनकी करीब 2,810 स्क्वायर मीटर जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया गया है। उन्होंने 8 सितंबर को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर अपनी यह शिकायत दर्ज कराई थी।
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मंत्रालय में हुई उच्चस्तरीय बैठक: मामले की गंभीरता को देखते हुए 15 सितंबर को महाराष्ट्र मंत्रालय में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्रीकर परदेशी की अध्यक्षता में एक बैठक बुलाई गई, जिसमें असगर अली और बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता दोनों शामिल हुए।
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बीजेपी विधायक का कदम: बैठक के दौरान विधायक नरेंद्र मेहता ने टाउन प्लानिंग डिपार्टमेंट को एक पत्र सौंपकर विवादित जमीन का कब्जा छोड़ने और वहां मिले निर्माण की अनुमति को सरेंडर करने की बात कही। साथ ही, उन्होंने असगर अली के खिलाफ अपनी पुरानी शिकायत भी वापस लेने का फैसला किया। हालांकि, विधायक ने जमीन पर अवैध कब्जे के आरोपों से इनकार करते हुए दावा किया कि उन्होंने यह जमीन 2019 में कानूनी रूप से खरीदी थी और यह मामला कोर्ट में भी चल रहा है।
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पीएम मोदी और असगर अली का रिश्ता: असगर अली वोरा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के वडनगर स्थित बीएन स्कूल में एक साथ पढ़ाई की थी। दशकों बाद दोनों की मुलाकात और उसके बाद प्रशासनिक स्तर पर हुई त्वरित कार्रवाई अब चर्चा का विषय बन गई है।