नई दिल्ली | दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में बिल्डिंग गिरने की घटना के बाद आखिरकार MCD ने अवैध निर्माण के खिलाफ बड़ा एक्शन लिया है. दिल्ली नगर निगम ने बिल्डिंग डिपार्टमेंट के तीन इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है. इन अधिकारियों पर अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई में लापरवाही बरतने का आरोप है.
MCD ने यह कार्रवाई 10 सितंबर को जारी आदेश के तहत की है. निगम ने साफ किया है कि अवैध निर्माण के मामलों में ड्यूटी में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
तीन इंजीनियरों पर गिरी गाज
MCD के मुताबिक, साउथ वेस्ट जोन यानी पूर्व नजफगढ़ जोन के बिल्डिंग डिपार्टमेंट में तैनात असिस्टेंट इंजीनियर रविंदर कुमार को निलंबित किया गया है.
इसके अलावा इसी जोन के दो जूनियर इंजीनियर सुमन सौरभ और मोहित यादव को भी तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है.
निगम ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि फील्ड में तैनात कर्मचारी अवैध निर्माण या नियमों के उल्लंघन की जानकारी मिलने पर तुरंत कार्रवाई करें. साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि कार्रवाई निर्धारित नियमों के मुताबिक हो.
सत्य निकेतन हादसे के बाद तेज हुई कार्रवाई
सत्य निकेतन में PG हॉस्टल की इमारत गिरने के बाद दिल्ली में अवैध और असुरक्षित निर्माण को लेकर सवाल उठे थे. इसके बाद MCD ने दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में ऐसी इमारतों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है.
रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक 61 इमारतों को सील किया जा चुका है, जबकि 41 इमारतों को ध्वस्त करने के आदेश जारी किए गए हैं.
MCD का कहना है कि बिल्डिंग नियमों का उल्लंघन करने वाली इमारतों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी.
चांदनी चौक में भी 54 बेसमेंट दुकानें सील
अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई का असर चांदनी चौक में भी देखने को मिला. 10 सितंबर को कूचा महाजनी ज्वेलरी मार्केट में बेसमेंट में चल रही 54 दुकानों को सील किया गया.
बताया गया कि इन दुकानों को बिल्डिंग और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के चलते बंद कराया गया.
अधिकारियों को दी सख्त चेतावनी
MCD ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि अगर किसी स्तर पर अधिकारी अपनी जिम्मेदारी निभाने में लापरवाही करते पाए गए, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी.
निगम का कहना है कि दिल्ली में अवैध निर्माण पर रोक लगाने और बिल्डिंग से जुड़े सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए अभियान आगे भी जारी रहेगा.
सत्य निकेतन हादसे के बाद शुरू हुई यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि MCD अब अवैध निर्माण और नियमों की अनदेखी के मामलों में फील्ड अधिकारियों की जवाबदेही तय करने पर जोर दे रही है.