नई दिल्ली | राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ईसाई समुदाय के लिए कब्रिस्तानों और शव दफनाने के लिए जगह की भारी कमी के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने बेहद गंभीर रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने नगर निगम (MCD) को निर्देश दिया है कि वह राजधानी में मौजूद सभी ईसाई कब्रिस्तानों, उनकी मौजूदा स्थिति और वहां दफनाने के लिए बची जगह का पूरा रिकॉर्ड अदालत के समक्ष पेश करे।
अदालत की सख्ती और सुनवाई के मुख्य बिंदु:
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चीफ जस्टिस की बेंच ने की सुनवाई: मामले की सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने की। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि दिल्ली नगर निगम अधिनियम के तहत नागरिकों को अंतिम संस्कार के लिए उचित और पर्याप्त जगह उपलब्ध कराना MCD का प्राथमिक और वैधानिक दायित्व है, जिसके तहत कब्रिस्तान और दफन स्थल भी आते हैं।
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दूसरे राज्यों तक जाने को मजबूर परिवार: याचिका में कोर्ट को बताया गया कि दिल्ली में पर्याप्त ईसाई कब्रिस्तान न होने के कारण कई परिवारों को अपनों के अंतिम संस्कार के लिए पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों का रुख करना पड़ रहा है, जिससे उन्हें भारी मानसिक, सामाजिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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वैकल्पिक जमीनों का विवाद: याचिकाकर्ता के मुताबिक, जून 2025 से लगातार DDA और MCD के अधिकारियों से पत्राचार और आरटीआई के जरिए गुहार लगाई जा रही है। पहले डीडीए द्वारा खजूरी खास, राजीव गांधी अस्पताल के पास और सुंदर नगरी में जमीन चिन्हित की गई थी, लेकिन बाद में ये विकल्प भी हाथ से निकल गए जिससे संकट और गहरा गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब हाईकोर्ट ने नगर निगम से विस्तृत जवाब तलब किया है। इस मामले की अगली सुनवाई आगामी 4 नवंबर को होगी, जिसमें एमसीडी को राजधानी में ईसाई कब्रिस्तानों की वास्तविक स्थिति और उपलब्ध जगह का ब्योरा देना होगा।