रायपुर । वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने मंगलवार को नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद के ऑडिटोरियम में विभागीय गतिविधियों और उपलब्धियों को लेकर प्रेस वार्ता की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार “हरित छत्तीसगढ़, समृद्ध छत्तीसगढ़” के संकल्प के साथ काम कर रही है। सरकार का लक्ष्य वन संरक्षण के साथ वनवासियों की समृद्धि, जनजातीय संस्कृति का संरक्षण, किसानों की आय बढ़ाना, महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार तथा वन्यजीव संरक्षण है।
किसान वृक्ष मित्र योजना से 62 हजार एकड़ में पौधरोपण
मंत्री ने बताया कि किसान वृक्ष मित्र योजना के तहत पात्र किसानों को 5 एकड़ तक 100 प्रतिशत और इससे अधिक भूमि पर 50 प्रतिशत वित्तीय अनुदान दिया जा रहा है। पिछले दो वर्षों में 36,896 हितग्राहियों की 62,441 एकड़ कृषि भूमि में 3.675 करोड़ से अधिक पौधों का रोपण किया गया है।
तेंदूपत्ता संग्राहकों को 757 करोड़ का ऑनलाइन भुगतान
कश्यप ने बताया कि छत्तीसगढ़ में तेंदूपत्ता संग्रहण दर 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा है, जो देश में सर्वाधिक है। वर्ष 2025 में 11.44 लाख परिवारों ने 13.85 लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहित किया, जिसके एवज में 757 करोड़ रुपये का ऑनलाइन भुगतान किया गया। 7.14 लाख संग्राहकों को 153 करोड़ रुपये प्रोत्साहन पारिश्रमिक दिया गया। 12.40 लाख महिला संग्राहकों को चरण पादुका वितरित की गई है, जबकि वर्ष 2026 में 12.38 लाख पुरुष संग्राहकों को चरण पादुका देने का प्रस्ताव है।
समर्थन मूल्य पर 36,580 क्विंटल वनोपज की खरीदी कर संग्राहकों को 16.66 करोड़ रुपये का ऑनलाइन भुगतान किया गया। राजमोहिनी देवी सुरक्षा योजना के तहत 1,862 प्रकरणों में 26.08 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों के 8,533 विद्यार्थियों को 12.07 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति दी गई है।
महिला समूहों को वनोपज से रोजगार
प्रधानमंत्री जनजाति विकास मिशन और पीएम जनमन योजना के तहत लघु वनोपज संग्रहण एवं प्रसंस्करण से 6 हजार से अधिक महिला स्व-सहायता समूहों की 70 हजार से ज्यादा महिलाएं लाभान्वित हुई हैं। वन धन केंद्रों से जुड़े महिला समूहों को 5 करोड़ रुपये से अधिक कमीशन दिया गया। इन केंद्रों में 181 प्रकार के हर्बल उत्पाद तैयार किए गए, जिनकी कुल कीमत 4.42 करोड़ रुपये रही।
बस्तर में लौट रहा रोजगार और विकास
मंत्री ने कहा कि माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के बाद वन विभाग ने अति-संवेदनशील क्षेत्रों में भी वानिकी और विदोहन कार्य फिर शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, बस्तर, नारायणपुर, कोंडागांव और कांकेर के दूरस्थ वन क्षेत्रों में इमारती लकड़ी और बांस विदोहन के कार्य किए जाएंगे। इससे करीब 21.67 लाख मानव-दिवस रोजगार सृजित होने का अनुमान है।
पीएम जनमन योजना के तहत 58.002 हेक्टेयर और 99.995 किलोमीटर मार्ग से जुड़े 20 प्रकरणों को अनुमति दी गई है। वन अधिकार अधिनियम की धारा 3(2) के तहत 417 प्रकरणों में 1,300 से 1,400 किलोमीटर मार्ग के लिए ग्रामसभा की अनुशंसा के बाद अनुमति जारी की गई।
प्रदेश में बाघों की संख्या लगभग दोगुनी
वन्यजीव संरक्षण की उपलब्धियां गिनाते हुए कश्यप ने बताया कि वर्ष 2022 में छत्तीसगढ़ में बाघों की संख्या 18 थी, जो वर्ष 2026 में बढ़कर 35 हो गई है। उन्होंने इसे 94 प्रतिशत की वृद्धि बताया। 2,829.387 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाला गुरुघासीदास-तमोर पिंगला देश का तीसरा सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है। बांधवगढ़ से तीन बाघिनों के ट्रांसलोकेशन की अनुमति भी एनटीसीए से मिल चुकी है और बारिश के बाद इन्हें स्थानांतरित किया जाना प्रस्तावित है।
बारनवापारा अभयारण्य में कृष्ण मृगों की संख्या 77 से बढ़कर 200 से अधिक हो गई है। इस उपलब्धि की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 अप्रैल 2026 के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में सराहना की थी।
मानव-हाथी द्वंद्व कम करने तकनीक का सहारा
मंत्री ने बताया कि मानव-हाथी द्वंद्व को कम करने के लिए ‘गज संकेत’ ऐप और ‘गजरथ यात्रा’ के जरिए तकनीक व जनभागीदारी को जोड़ा गया है। 90 हाथी मित्र दलों के 545 प्रशिक्षित सदस्य गांव-गांव जाकर जागरूकता अभियान चला रहे हैं। 12 अगस्त 2026 को विश्व हाथी दिवस के अवसर पर दरभा में ‘गज संकेत’ ऐप का विमोचन किया गया।
240 प्राकृतिक पर्यटन केंद्र विकसित
प्रदेश में 240 प्राकृतिक पर्यटन केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें 50 से अधिक केंद्र पूरी तरह स्वावलंबी हो चुके हैं। बस्तर के धुड़मारास में सामुदायिक पर्यटन के जरिए 40 प्रत्यक्ष और 20 अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए हैं। महासमुंद के शिशुपाल इको ट्रेल को 45 लाख रुपये की लागत से विकसित किया गया है। वहीं कवर्धा सफारी मॉडल के तहत 35 किलोमीटर लंबा नया सफारी मार्ग तैयार किया गया है।
कांगेर घाटी को यूनेस्को की अस्थायी सूची में स्थान
कश्यप ने बताया कि 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान को वर्ष 2025 में यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल किया गया। यहां 35 जिप्सी वाहन उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे करीब 200 स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिला है।
राज्य का पहला रामसर साइट घोषित
उन्होंने बताया कि बिलासपुर के कोपरा जलाशय को छत्तीसगढ़ का पहला रामसर साइट घोषित किया गया है। Vision@2047 के तहत वर्ष 2030 तक प्रदेश में 20 रामसर साइट विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। राज्य में 500 से अधिक वेटलैंड मित्र कार्यरत हैं।
वन प्रशासन में डिजिटल व्यवस्था लागू
मंत्री ने कहा कि वन विभाग की भुगतान प्रक्रिया को एंड-टू-एंड डिजिटल किया गया है और इसे ई-कुबेर तथा ई-कोष प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1,520 करोड़ रुपये से अधिक का ऑनलाइन भुगतान हुआ, जबकि वित्तीय वर्ष 2026-27 में अगस्त 2026 तक 209 करोड़ रुपये का ऑनलाइन भुगतान किया जा चुका है।
वन विभाग के मुख्यालय से लेकर सभी वनमंडल स्तर तक ई-ऑफिस 100 प्रतिशत लागू है। SPARROW में 8,975 अधिकारी-कर्मचारी और eHRMS में 32,869 अधिकारी-कर्मचारी ऑनबोर्ड हैं। वहीं iGOT कर्मयोगी में 9,230 अधिकारी-कर्मचारी जुड़े हैं।
वन अग्नि की घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई के लिए अत्याधुनिक फॉरेस्ट फायर अलर्ट एवं मॉनिटरिंग सिस्टम संचालित है। इससे रिस्पॉन्स टाइम 1-2 घंटे से घटकर 5-10 मिनट हो गया है और इसे बीट स्तर तक विस्तार दिया जा रहा है।
मंत्री ने कहा कि सरकार वन संरक्षण को केवल जंगल बचाने तक सीमित नहीं मानती, बल्कि इसके साथ वनवासियों की आजीविका, पर्यावरण संरक्षण, रोजगार, संस्कृति और आधुनिक तकनीक आधारित वन प्रबंधन को भी समान प्राथमिकता दे रही है।