रायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने रविवार को राजधानी रायपुर स्थित महंत घासीदास संग्रहालय सभागृह में युवा साहित्यकार श्री करुणा सागर पण्डा के उपन्यास ‘कोहरा’ का विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि साहित्य केवल समाज का दर्पण नहीं, बल्कि उसे सजग करने और सही दिशा दिखाने का सशक्त माध्यम भी है। ‘कोहरा’ जैसी रचनाएं सामाजिक विषयों को विमर्श के केंद्र में लाने का महत्वपूर्ण कार्य करती हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने श्री करुणा सागर पण्डा को उपन्यास के प्रकाशन पर बधाई देते हुए कहा कि संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण विषयों पर लेखन के लिए साहस की आवश्यकता होती है। जब रचनाकार समाज की समस्याओं और वास्तविकताओं को अपनी लेखनी का विषय बनाते हैं, तो साहित्य सामाजिक चेतना का प्रभावी माध्यम बन जाता है।
उन्होंने छत्तीसगढ़ की समृद्ध साहित्यिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश ने देश को अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकार दिए हैं। विनोद कुमार शुक्ल को ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। वहीं मुक्तिबोध की सृजनभूमि और पदुमलाल पन्नालाल बख्शी जैसे साहित्यकारों की धरती रहे छत्तीसगढ़ में नई पीढ़ी के रचनाकार भी इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
हर घर में हो छोटी-सी लाइब्रेरी
मुख्यमंत्री ने लोगों से अपने घरों में छोटी-सी लाइब्रेरी बनाने और बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि घर की समृद्धि केवल उसकी भव्यता से नहीं, बल्कि वहां उपलब्ध पुस्तकों और अध्ययन की संस्कृति से भी दिखाई देती है। पुस्तकें पीढ़ियों के बीच ज्ञान, संस्कार और अनुभव का सेतु बनती हैं।
नक्सलवाद से प्रभावित लोगों की पीड़ा को भी साहित्य में मिले स्थान
मुख्यमंत्री श्री साय ने साहित्यकारों से नक्सलवाद से प्रभावित लोगों की पीड़ा और संघर्ष को भी अपनी रचनाओं का विषय बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने लंबे समय तक नक्सल हिंसा का दंश झेला है। हिंसा के कारण अनेक परिवारों ने अपनों को खोया, बच्चों की शिक्षा और भविष्य प्रभावित हुआ तथा कई क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से दूर रहे।
उन्होंने कहा कि इस मानवीय त्रासदी और समाज पर पड़े उसके प्रभावों को व्यापक रूप से सामने लाने की आवश्यकता है। साहित्यकार अपनी संवेदनशील लेखनी के माध्यम से प्रभावित परिवारों के संघर्ष और बदलते बस्तर की कहानी देश-दुनिया तक पहुंचा सकते हैं।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री सुनील गंगाराम गर्ग ने ‘कोहरा’ को समकालीन विषय पर आधारित प्रासंगिक कृति बताया। छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा ने कहा कि सामाजिक प्रश्नों पर सार्थक विमर्श पैदा करने वाली रचनाएं समाज को आत्ममंथन का अवसर देती हैं।
छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष श्री प्रभात मिश्रा ने कहा कि ‘कोहरा’ समस्या को सामने रखने के साथ समाधान की दिशा में सोचने के लिए भी प्रेरित करता है। वरिष्ठ साहित्यकार श्री गिरीश पंकज ने इसे साहसिक लेखन का उदाहरण बताते हुए कहा कि साहित्य समाज में वैचारिक चेतना और सकारात्मक प्रतिरोध को मजबूत करता है।
इस अवसर पर विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, राज्य गौसेवा आयोग के उपाध्यक्ष श्री राजीव लोचन महाराज, श्री जलज कुमार अनुपम सहित जनप्रतिनिधि, साहित्यकार, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।