रायपुर । प्रदेश में नेत्रदान को बढ़ावा देने और इससे जुड़ी स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने के उद्देश्य से डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर में एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। क्षेत्रीय नेत्र अनुसंधान संस्थान (RIO) और नेत्र रोग विभाग, पं. जवाहर लाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में प्रदेश के 32 जिलों से 100 से अधिक नेत्र सहायक अधिकारियों और सहायक नेत्रदान अधिकारियों ने भाग लिया।
नेत्रदान की पूरी प्रक्रिया पर दिया गया प्रशिक्षण
“नेत्रदान प्रक्रियाओं पर नवीनतम जानकारी” विषय पर आयोजित कार्यशाला में प्रतिभागियों को नेत्रदान से जुड़ी पूरी प्रक्रिया का सैद्धांतिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इसमें शोकग्रस्त परिवारों से संवाद और काउंसलिंग, भ्रांतियों का समाधान, संभावित दाताओं का चयन एवं मेडिकल स्क्रीनिंग, कॉर्निया प्राप्ति, संरक्षण, कोल्ड चेन और सुरक्षित परिवहन जैसे विषयों पर विशेष जोर दिया गया।
इसके अलावा कन्सेंट फॉर्म, डेथ सर्टिफिकेट और आई बैंक रिकॉर्ड सहित जरूरी दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया की जानकारी भी दी गई।
हैंड्स-ऑन और डेमोंस्ट्रेशन से समझाई तकनीक
कार्यशाला में केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित न रहकर प्रतिभागियों को हैंड्स-ऑन और डेमोंस्ट्रेशन आधारित प्रशिक्षण दिया गया। एन्यूक्लिएशन की वीडियो डेमोंस्ट्रेशन, इन-सिटू कॉर्नियोस्क्लेरल रिम प्राप्त करने, संरक्षण एवं परिवहन की प्रक्रिया के साथ मॉइस्ट चैंबर तैयार करने की तकनीक भी समझाई गई।
वास्तविक मामलों पर चर्चा, इंटरैक्टिव क्विज और रोल-प्ले के जरिए कठिन परिस्थितियों में मृतक के परिवार से संवेदनशीलता के साथ संवाद एवं परामर्श करने का अभ्यास कराया गया।
स्वास्थ्य मंत्री की पहल को आगे बढ़ाने की दिशा में कदम
कुछ माह पहले चिकित्सा महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने प्रदेश में नेत्रदान को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया था। इसी पहल को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े से पहले स्वास्थ्यकर्मियों के लिए यह प्रशिक्षण आयोजित किया गया, ताकि वे अपने-अपने क्षेत्रों में लोगों को नेत्रदान के लिए जागरूक करने और संभावित दाताओं के परिजनों की प्रभावी काउंसलिंग करने में सक्षम बन सकें।
प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका अहम
नेत्रदान की सफलता में चिकित्सकों के साथ-साथ नेत्र सहायक अधिकारियों और सहायक नेत्रदान अधिकारियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। संभावित दाता की पहचान से लेकर परिवार से संपर्क, काउंसलिंग, नेत्र प्राप्ति, संरक्षण और दस्तावेजीकरण तक पूरी प्रक्रिया में इन स्वास्थ्यकर्मियों की अहम भूमिका रहती है।
महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी के मार्गदर्शन और डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर के व्यवस्थागत सहयोग से कार्यशाला का आयोजन किया गया।
नेत्रदान से मिल सकता है दृष्टि का नया उजाला
राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा 25 अगस्त से 8 सितंबर तक मनाया जाएगा। इससे पहले आयोजित यह प्रशिक्षण प्रदेश में नेत्रदान की गतिविधियों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया और उन्हें प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान एवं कौशल का उपयोग कर अधिक से अधिक लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित करने का संदेश दिया। कार्यशाला का समापन पोस्ट-टेस्ट और प्रतिभागियों के फीडबैक के साथ हुआ।
कार्यशाला का मुख्य संदेश रहा कि एक नेत्रदान किसी जरूरतमंद के जीवन में दृष्टि, उम्मीद और नई रोशनी ला सकता है।