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तोखन अध्यक्ष और पांडे मंत्री?
मंत्रिमंडल में परिवर्तन की खबरें अब अटकलों से बाहर निकलते दिखाई देने लगी हैं। छत्तीसगढ़ की राजनीति में परिवर्तन की अटकलें अब सच के नजदीक खड़ी दिख रही हैं। केन्द्रीय संगठन के बाद अब केन्द्र्रीय मंत्रिमंडल की बारी है। और यदि इस बीच कोई नया समीकरण नहीं बना तो छत्तीसगढ़ से एक और सांसद को केन्द्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिलने की प्रबल संभावना है। दरअसल भाजपा के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष किरणदेव बीते दिनों सड़क दुर्घटना में गंभीर रुप से घायल हो गए हैं, उनका अभी भी इलाज जारी है। किरणदेव के रिकवर होने में अभी और समय लगने की खबरें हैं। इस बीच राजनीतिक हलचल तेज होने लगी है। संभव है किरणदेव के रिकवर होते ही उन्हें विष्णु मंत्रिमंडल में जगह मिल जाए। वहीं भाजपा केन्द्रीय नेतृत्व के बाद राज्यों की कमान भी युवाओं को सौंपने का क्रम जारी रखेगी। ऐसे में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की रेस में बिलासपुर सांसद तोखन साहू का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। तोखन साहू भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष बनाए जा सकते हैं। वहीं राजनांदगांव सांसद संतोष पांडे को मोदी मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है, या फिर किसी महिला सांसद को केन्द्र में मंत्री बनाया जा सकता है। कुल मिलाकर जिस खबर को कुछ दिन पहले तक सिर्फ अटकलें माना जा रहा था, वह अब सच के पास खड़ी दिख रही है।
मंत्रियों से संघ खफा
राज्य के कुछ मंत्रियों की छवि इन दिनों जनता के बीच ही नहीं बल्कि संगठन और संघ के बीच भी धूमिल सी दिखाई देने लेगी है। इन मंत्रियों के चेहरे पर भ्रष्टाचार रुपी धूल की परत साफ नजर आने लगी है। शायद यहीं कारण है कि संगठन और संघ के बड़े पदाधिकारी भी अब मंत्रियों को खरी-खोटी सुनाने से परहेज नहीं कर रहे हैं। मंत्रियों का दायित्व है कि उनके नियंत्रण में हो रहे काम की जवाबदेही तय होनी चाहिए। लेकिन यहां जवाबदेही कोसों दूर नजर नहीं आ रही है, नतीजन संगठन और संघ के बड़े चेहरे अब खरी-खोटी सुनाने से खुद को रोक नहीं पा रहे हैं। दरअसल वर्तमान शिक्षा सत्र का तकरीबन एक तिहाई समय बीत चुका है। इस बीच 700 से अधिक शिक्षकों के तबादले कर दिये गए हैं। वहीं अभी सैकड़ों की संख्या में शिक्षकों का तबादला होना बाकी है। अब सोचिए कि बीच शिक्षा सत्र में यदि शिक्षकों का तबादला होगा तो बच्चों के शिक्षा में क्या असर पड़ेगा? यही नहीं सबसे आश्चर्य की बात यह है कि शिक्षकों के स्थानान्तरण जरुरत या स्कूलों की मांग के अनुसार नहीं हो रहे, बल्कि सीधा नोट सीट मंत्री के दरवाजे से महानदी भवन पहुंच रही है। जाहिर सी बात है कि बात निकली है तो दूर तक जाएगी। कहा तो यह भी जाता है कि इस बीच मंत्री जी एक धार्मिक स्थल पहुंचेे थे, वहां पर संघ के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने उन्हें खरी-खोटी सुना दी। बाद में मामले को संभाला गया और बंद कक्ष में चर्चा हुई।
मंत्रियों से संगठन भी खफा?
मंत्रियों और संघ के हालात बयां किए जा चुके हैं। अब बात करते हैं मंत्री और संगठन की। हाल ही में संगठन के एक बड़े पदाधिकारी ने एक मंत्री को जमकर फटकार लगाई। संगठन की कमान संम्भाल रहे भाई साहब को हर नेता की नब्ज मालूम है। कौन कितना पानी में है? कौन क्या काम कर रहा है? संगठन की सब पर नजर है। दरअसल संगठन की कमान संभालने वाले भाई साहब का एक क्षेत्र में दौरा था। यह दौरा सड़क मार्ग से था। अब सड़कों की हालत तो पूरा प्रदेश देख रहा है। भाई साहब ने भी देखा, उन्हें हालात देखकर दर्द हुआ, पीड़ा हुई, कि आखिर सरकार के तीन साल पूरे होने जा रहे हैं, ऐसे में सड़कों की यह हालत क्यों है? कौन है इसका असली जिम्मेदार? आने वाले समय में जनता को क्या जवाब दिया जाएगा? शायद इसीलिए भाई साहब से रहा नहीं गया, उन्होंने राज्य के एक मंत्री को खस्ताहाल सड़कों को लेकर जमकर फटकार लगा दी। कुल मिलाकर मंत्रियों की कार्यप्रणाली से संघ भी खुश नहीं है और संगठन भी, यदि हालात ऐसे ही रहे तो जनता की बात कौन करेगा?
स्कूल शिक्षा वापस लिया जाएगा?
तकरीबन एक साल पहले विष्णु मंत्रिमंडल में तीन नए मंत्रियों ने शपथ ली थी। जिसमें गजेन्द्र यादव एकमात्र ऐसे विधायक थे जिनकी जगह शुरु से पक्की मानी जा रही थी। जबकि दो अन्य मंत्रियों खुशवंत गुरु और राजेश अग्रवाल के नाम का किसी को अंदाजा नहीं था। लेकिन एक साल के भीतर ही जिस तेजी से गजेन्द्र यादव चर्चा में रहे, मंत्री बने, उसी तेजी से उनका ग्राफ भी नीचे गिरते दिखाई दे रहा है। दरअसल यह बात हम इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि भाजपा के अंदरखाने में चर्चा है कि मंत्री गजेन्द्र यादव से स्कूल शिक्षा विभाग वापस लिया जा सकता है और यह विभाग एक बार फिर बस्तर के किसी नेता को सौंपा जा सकता है। अटकलें तो यह भी हैं कि किरणदेव के मंत्री बनने के बाद स्कूल शिक्षा विभाग की कमान उन्हें सौंपी जाएगी। इन अटकलों के बीच संगठन प्रमुख अजय जामवाल भोपाल से सीधा दिल्ली रवाना हुए हैं, तो वहीं पवन साय और संगठन के दो और पदाधिकरी भी दिल्ली पहुंचे हैं। अब इन अटकलों में किनती सच्चाई है यह तो निकट भविष्य में स्पष्ट हो ही जाएगा, लेकिन इस बीच इस राजनीतिक घटनाक्रम की जमकर चर्चा हो रही है।
सोनमणि और भुवनेश का बढ़ा कद
राज्य सरकार ने बीते दिनों बडी प्रशासनिक सर्जरी करते हुए तकरीबन आधा दर्जन कलेक्टरों समेत 22 आईएएस अफसरों की तबादला लिस्ट जारी की है। जिसमें 6 वर्ष से अधिक समय तक मेन धुरी से बाहर रहे 1999 बैच के आईएएस अफसर सोनमणि बोरा का कद बढ़ाया गया है, सोनमणि बोरा नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव बनाए गए हैं। वहीं इस लिस्ट में तीन साल से लूप लाइन में रहे 2006 बैच के आईएएस अफसर भुवनेश यादव को भी मेन स्ट्रीम में लाया गया है, भुवनेश को ट्राइबल विभाग का नया सचिव बनाया गया है। कलेक्टरों में 2014 बैच के आईएएस अफसर कुंदन कुमार का कद बढ़ाया गया है, कुंदन को मुंगेली जिले से बाहर निकालकर कांकेर जिले का नया कलेक्टर बनाया गया है। वहीं 2014 बैच के आईएएस अफसर अमृत विकास तोपनों भी कलेक्टरी बचाने में सफल हुए हैं। उन्हें सक्ति जिले से हटाकर मुंगेली जिला का नया कलेक्टर बनाया गया है। 2011 बैच के आईएएस अफसर नीलेश क्षीरसागर की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठ रहे थे, इसलिए उन्हें कांकेर से हटाया गया है। हालांकि नीलेश क्षीरसागर के प्रतिनियुक्ति में जाने की भी खबरें हैं। इसके साथ ही 2012 बैच के आईएएस अफसर रणबीर शर्मा का छह माह के भीतर तीसरी बार तबादला किया गया है, रणबीर को गरियाबंद का नया कलेक्टर बनाया गया है।
कलेक्टरों की एक और लिस्ट
राज्य सरकार ने 22 आईएएस और एक आईएफएस अफसर की लिस्ट जारी है। कुल मिलाकर बीते लिस्ट में 23 अफसरों के तबादले हुए हैं। ऐसे में कुछ जिले के कलेक्टरों को इसलिए अभयदान दे दिया गया है क्योंकि यह लिस्ट बहुत लंबी हो रही थी। इसके साथ ही तीन बड़े जिले के कलेक्टरों को कहां-कहां शिप्ट किया जाए इस पर भी पूरी सहमति नहीं बन पाई है। जिसके चलते तकरीबन 5 कलेक्टरों को कुछ दिनों के लिए अभयदान मिल गया है। लेकिन यह लिस्ट लंबे समय तक नहीं रोकी जा सकती। विष्णु सरकार के तीन साल पूरे होने से पहले इन कलेक्टरों को भी बदल दिया जाएगा। क्योंकि सरकार अब अपने बचे कार्यकाल में योजनाओं को गति से जनता तक पहुंचाने के लिए कार्य करना चाहती है। ऐसे में कुछ और आईएएस अफसरों की लिस्ट कभी भी जारी हो सकती है।
महंत के साथ खेला तो नहीं?
वैसे तो नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत राजनीति के एक सुलझे खिलाड़ी हैं। लेकिन कांग्रेस की वर्तमान राजनीति में जो घटनाएं उजागर हो रही हैं, वह महंत को परेशान करने वाली हैं। दरअसल समय जिस तेजी से बीत रहा है, उसी तेजी से राजनीतिक परिदृश्य भी बदलते दिख रहे हैं। वैसे भी कहा जाता है कि राजनीति में कोई किसी का दोस्त नहीं होता और दुश्मन भी नहीं। कुछ साल पहले तक पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव और अमरजीत भगत धुर विरोधी माने जाते थे। समय बदला सिंहदेव और अमरजीत अब साथ दिखने लगे हैं। पूर्व सीएम भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव की राजनीतिक अदावत जगजाहिर है। लेकिन सिंहदेव और भूपेश में भी दूरियां खत्म होते दिख रही हैं। निश्चित ही इन तामाम राजनीतिक घटनाओं ने नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास को परेशान करना शुरु कर दिया होगा। क्योंकि अभी तक राज्य कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज और नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत की एकक्षत्र चल रही थी, लेकिन जैसे-जैसे चुनावी वर्ष नजदीक आ रहा है, राजनीतिक परिदृश्य बदलते दिख रहा है। कहीं सब नेता एकजुट होकर मंहत के साथ खेला करने की तैयारी में तो नहीं है? हालांकि महंत अपनी लाइन लेकर चलने वाले नेता है, लेकिन राजनीति में जब तामाम प्रतिद्वंदी एकजुट होने लगे तो यह माना जाता है कि वर्तमान नेतृत्व का खतरा बढऩे लगा है।
फिर सुनाई देने लगी डीएमएफ कांड की गूंज
वैसे तो डीएमएफ की राशि का उपयोग क्षेत्र के विकास और आवाश्यक जरुरतों को पूरा करने के लिए होता है। लेकिन पूर्व की कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए डीएमएफ कांड की गूंज पूरे देश में सुनाई देती रही है। लेकिन अब पुरानी सरकार के कांड को सुनने और देखने में आम जनता की रुचि नहीं रही। इसलिए अब नए-नए कांड उजागर होने लगे हैं। दरअसल कांकेर जिले में डीएमएफ की राशि की बदंरबांट के गंभीर आरोप लग रहे हैं। एक भाजपा नेता की माने तो यहां विभिन्न स्थानों में तकरीबन 150 करोड की राशि से टीने का शेड तैयार किए गए हैं। यह शेड प्रार्थना के साथ ही अन्य उद्देश्यो के लिए बनाए गए हैं। हालांकि वास्तविक आकड़े तो जांच के बाद ही उजागर होंगे। लेकिन बंदरबांट की तस्वीरें उजागर हो चुकी हैं। ढेकेदारों और अफसरों के द्वारा भ्रष्टाचार के लिए बुनी गई यह मकडज़ाल जनता को भी दिखने लगी हैं। क्योंकि यहां अधिकांश स्कूलें भवन विहीन हैं, उसकी व्यवस्था को प्राथमिकता नहीं दी गई, बल्कि 20-20 लाख रुपये के टीेने के शेड खड़े कर दिए गए हैं, वो भी बिना कॉलम और बिम के। कांकेर जिले में बनाए गए यह शेड प्राथमिक जांच में ही धराशयी हो गए। ग्रामीण इस भ्रष्टाचार को देखकर लामबंद हो रहे हैं। आरईएस के अधिकारी इसे तोडकर पुन: बनाने की बात कह रहे हैं। कुल मिलाकर डीएमएफ में भ्रष्टाचार की खबरें इस सरकार में भी तैरने लगी हैं।
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