रायपुर । छत्तीसगढ़ में श्रमिकों के सम्मान, सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण को लेकर राज्य सरकार द्वारा व्यापक स्तर पर पहल की जा रही है। श्रम मंत्री श्री लखन लाल देवांगन के निर्देशन में श्रम विभाग ने प्रशासनिक ढांचे के विस्तार से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, कौशल विकास और डिजिटल सेवाओं तक कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
56 लाख से अधिक श्रमिक पंजीकृत
श्रम विभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न मंडलों के माध्यम से अब तक करीब 56.83 लाख संगठित, निर्माण एवं असंगठित श्रमिकों का पंजीयन किया जा चुका है। वर्ष 2026 में 30 जून तक करीब 3.48 लाख श्रमिकों को बीमा, चिकित्सा, स्वास्थ्य, शिक्षा और कौशल उन्नयन जैसी योजनाओं का लाभ मिला है। इन योजनाओं पर करीब 173.32 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
पांच नए जिलों में श्रम कार्यालय
श्रम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और श्रमिकों तक सेवाओं की बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने के लिए पांच नए जिलों में श्रम पदाधिकारी कार्यालय स्थापित किए गए हैं। पांच श्रम पदाधिकारी कार्यालयों को सहायक श्रमायुक्त कार्यालय के रूप में उन्नत किया गया है। अब प्रदेश में 10 सहायक श्रमायुक्त और 23 श्रम पदाधिकारी कार्यालय सहित कुल 33 श्रम कार्यालय संचालित हैं।
निर्माण श्रमिकों को बढ़ी आवास सहायता
मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना के तहत आवास निर्माण या घर खरीदने के लिए मिलने वाली सहायता राशि को एक लाख से बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपये किया गया है। वहीं दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना में महिला निर्माण श्रमिकों को ई-रिक्शा खरीदने के लिए दी जाने वाली सहायता भी एक लाख से बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपये कर दी गई है।
श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा पर विशेष जोर
श्रमिक परिवारों के बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए अटल कैरियर निर्माण योजना शुरू की गई है। इसके तहत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चों को इंजीनियरिंग और मेडिकल जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निःशुल्क कोचिंग उपलब्ध कराई जाएगी।
अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के तहत पात्र निर्माण श्रमिकों के प्रथम दो बच्चों को कक्षा 6वीं से 12वीं तक उत्कृष्ट निजी आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा दी जा रही है। वर्ष 2026-27 से लाभान्वित बच्चों की संख्या 100 से बढ़ाकर 200 कर दी गई है।
स्वास्थ्य और पौष्टिक भोजन की सुविधा
मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक स्वास्थ्य परीक्षण योजना के तहत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। वहीं शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना के माध्यम से श्रमिकों को मात्र 5 रुपये में गरम और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश के 18 जिलों में 39 भोजन केंद्र संचालित हैं।
डिजिटल सेवाओं से बढ़ी पारदर्शिता
श्रम विभाग का ई-श्रम साथी मोबाइल एप श्रमिकों और नियोजकों के लिए महत्वपूर्ण डिजिटल प्लेटफॉर्म बन रहा है। इसके माध्यम से श्रमिक स्वयं पंजीयन कर सकते हैं और रोजगार संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इससे श्रमिकों और नियोजकों के बीच सीधा संपर्क स्थापित होने के साथ सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ी है।
इसके अलावा श्रमिकों को पंजीयन, योजनाओं के आवेदन, भोजन, पेयजल और विश्राम जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए मॉडल लेबर चौक फेसिलिटेशन सेंटर भी विकसित किए जा रहे हैं।
दुर्घटना और मृत्यु पर आर्थिक सहायता
मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना के तहत सामान्य मृत्यु पर आश्रितों को एक लाख रुपये, कार्यस्थल दुर्घटना में मृत्यु पर पांच लाख रुपये तथा स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में 2.50 लाख रुपये की सहायता दी जाती है। वहीं अपंजीकृत निर्माण श्रमिक की कार्यस्थल दुर्घटना में मृत्यु होने पर भी आश्रितों को एक लाख रुपये की सहायता का प्रावधान है।
असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल के अंतर्गत पंजीकृत श्रमिकों की मृत्यु पर आश्रितों को एक लाख रुपये तथा दिव्यांगता की स्थिति में 50 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है।
श्रम कानूनों में सुधार
औद्योगिक विकास और श्रमिक हितों के संतुलन के लिए श्रम कानूनों में भी बदलाव किए गए हैं। छत्तीसगढ़ कारखाना नियम, 1962 में संशोधन कर सुरक्षा प्रावधानों के साथ महिलाओं के रोजगार के अवसरों का विस्तार किया गया है। वहीं छत्तीसगढ़ दुकान एवं स्थापना नियम, 2021 में संशोधन के बाद श्रम पहचान पंजीयन प्रमाण-पत्र 24 घंटे के भीतर जारी करने का प्रावधान किया गया है।
राज्य सरकार की इन पहलों से श्रमिकों के लिए सुरक्षित कार्यस्थल, सामाजिक सुरक्षा, बेहतर स्वास्थ्य, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सम्मानजनक रोजगार और डिजिटल सेवाओं का विस्तार हो रहा है। इससे श्रमिकों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ते हुए छत्तीसगढ़ में श्रमिक कल्याण को नई दिशा मिल रही है।