रायपुर । छत्तीसगढ़ शासन के विभिन्न विभागों के डी.डी.ओ. (Drawing and Disbursing Officers) के बैंक खातों में जमा अव्ययित राशि (Unspent Balances) का समुचित संधारण और निगरानी सुनिश्चित करने के लिए जानकारी संकलित कर ई-कोष पोर्टल पर दर्ज की जाएगी। इसके लिए सभी बजट नियंत्रक अधिकारियों को अपने अधीनस्थ डी.डी.ओ. के बैंक खातों में 31 मार्च की स्थिति में पिछले पांच वर्षों के दौरान जमा अव्ययित राशि की जानकारी निर्धारित प्रारूप में तैयार कर 7 दिनों के भीतर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
इस संबंध में 14 अगस्त 2026 को आयोजित कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न विभागों के 42 बजट नियंत्रक अधिकारियों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला में अव्ययित राशि की जानकारी के संकलन, सत्यापन और ई-कोष पोर्टल पर दर्ज करने की प्रक्रिया को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
निर्धारित प्रारूप में देनी होगी जानकारी
कार्यशाला में हुई चर्चा के अनुसार बजट नियंत्रक अधिकारियों को अपने अधीनस्थ सभी डी.डी.ओ. के बैंक खातों में पिछले पांच वर्षों की 31 मार्च की स्थिति के अनुसार उपलब्ध अव्ययित राशि की जानकारी निर्धारित प्रारूप में तैयार करनी होगी।
यह जानकारी संबंधित कार्यालय के ई-मेल और बीसीओ व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से सॉफ्ट कॉपी में निर्धारित समय-सीमा के भीतर भेजने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही निर्धारित प्रारूप में Excel File भी उपलब्ध करानी होगी।
ई-कोष पोर्टल पर दर्ज होगी बैंक खातों की जानकारी
कार्यशाला में कार्यालय संचालक, कोष एवं लेखा के ई-कोष पोर्टल से संबंधित तकनीकी टीम के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। इस दौरान ई-कोष पोर्टल में पिछले पांच वर्षों के दौरान डी.डी.ओ. के बैंक खातों में स्थानांतरित राशि की जानकारी दर्ज करने को लेकर तकनीकी पहलुओं पर चर्चा हुई।
बैठक में बैंक खाता नंबर, पूर्वशेष सहित अन्य आवश्यक विवरणों में सुधार और बदलाव की प्रक्रिया पर भी तकनीकी चर्चा की गई।
वित्तीय प्रबंधन में आएगी पारदर्शिता
सभी बजट नियंत्रक अधिकारियों से अपेक्षा की गई है कि वे अपने अधीनस्थ डी.डी.ओ. से पिछले पांच वर्षों की अव्ययित राशि की जानकारी निर्धारित प्रारूप में समय-सीमा के भीतर प्राप्त कर उपलब्ध कराएं। इसके बाद कार्यालय संचालक, कोष एवं लेखा के समन्वय से इस जानकारी को ई-कोष पोर्टल पर दर्ज कराया जाएगा।
इस व्यवस्था से शासकीय विभागों के बैंक खातों में उपलब्ध अव्ययित राशि की स्थिति का प्रभावी संधारण, निगरानी और वित्तीय प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सकेगा। साथ ही सरकारी धन के उपयोग और उपलब्ध शेष राशि से संबंधित जानकारी को अधिक पारदर्शी एवं व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी।