डॉ. पंकज शर्मा बने भारतीय मानक ब्यूरो की एग्रो-टेक्सटाइल्स समिति के अध्यक्ष

रायपुर । भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान, रायपुर के संयुक्त निदेशक डॉ. पंकज शर्मा को भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) की एग्रो-टेक्सटाइल्स TXD 35 समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति उनके विशेषज्ञता, व्यापक अनुभव और मानकीकरण गतिविधियों में लंबे समय से किए जा रहे योगदान को देखते हुए की गई है।

एग्रो-टेक्सटाइल्स समिति भारतीय मानक ब्यूरो के अंतर्गत गठित तकनीकी समिति है, जो कृषि क्षेत्र में उपयोग होने वाली टेक्सटाइल सामग्रियों और उत्पादों के मानकीकरण से जुड़े कार्य करती है। समिति द्वारा उत्पादों के विनिर्देश, परीक्षण विधियों, तकनीकी शब्दावली और गुणवत्ता संबंधी आवश्यकताओं के लिए भारतीय मानकों के विकास एवं पुनरीक्षण पर कार्य किया जाता है।

पादप रोग प्रबंधन के क्षेत्र में व्यापक अनुभव

प्रख्यात पादप रोग विज्ञानी डॉ. पंकज शर्मा को पादप रोग प्रबंधन, पादप-रोगजनक अंतःक्रिया और जैविक स्ट्रेस प्रबंधन के क्षेत्र में व्यापक अनुभव है। इससे पहले वे भारतीय सरसों अनुसंधान संस्थान, भरतपुर में प्रधान वैज्ञानिक एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक तथा महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर में सहायक प्राध्यापक के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

डॉ. शर्मा ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई वैज्ञानिक संस्थानों एवं मंचों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने फ्रांस स्थित रेपसीड एवं कैनोला नवाचार से संबंधित वैश्विक परिषद और वैज्ञानिक पैनल सहित विभिन्न वैज्ञानिक निकायों के साथ कार्य किया है। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया, चीन, कनाडा, स्वीडन, फ्रांस और जर्मनी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक मंचों पर उन्होंने भारतीय अनुसंधान का प्रतिनिधित्व किया है।

वर्ष 2016 से समिति से जुड़े हैं डॉ. शर्मा

डॉ. पंकज शर्मा वर्ष 2016 से भारतीय मानक ब्यूरो की एग्रो-टेक्सटाइल्स समिति के सक्रिय सदस्य रहे हैं। अध्यक्ष के रूप में उनकी नियुक्ति मानकीकरण गतिविधियों में उनके दीर्घकालिक योगदान और वैज्ञानिक विशेषज्ञता की महत्वपूर्ण पहचान मानी जा रही है।

उनके नेतृत्व में एग्रो-टेक्सटाइल्स समिति के कार्यों में गुणवत्ता मानकों, नवाचार और सतत विकास को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। साथ ही कृषि एवं वस्त्र क्षेत्र में वैज्ञानिक प्रगति और गुणवत्तापूर्ण उत्पादों के विकास को नई दिशा मिलने की संभावना है।

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