नवा रायपुर । छत्तीसगढ़ अतिथि व्याख्याता पीएचडी, नेट, सेट एवं एम.फिल. कल्याण संघ के आह्वान पर प्रदेशभर के शासकीय महाविद्यालयों में कार्यरत अतिथि व्याख्याताओं, ग्रंथपालों एवं क्रीड़ाधिकारियों ने अपनी छह सूत्रीय मांगों को लेकर नवा रायपुर के तूता धरना स्थल पर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया। प्रदेश के विभिन्न जिलों और महाविद्यालयों से पहुंचे प्रदर्शनकारियों ने शासन-प्रशासन से लंबित मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान अतिथि व्याख्याताओं ने हाथों में बैनर, पोस्टर और मांगों से संबंधित तख्तियां लेकर अपनी आवाज बुलंद की। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने मांगों के समर्थन में रैली निकाली। पुलिस प्रशासन ने बैरिकेडिंग कर रैली को आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ गए और नारेबाजी करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया।

नियुक्ति में देरी पर जताई चिंता
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि वर्तमान शैक्षणिक सत्र में शासकीय महाविद्यालयों में अतिथि व्याख्याताओं की नियुक्ति में हो रही देरी चिंता का विषय है। उनके अनुसार, 17 जुलाई 2026 को नई नीति जारी होने के बावजूद अब तक नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। संघ का कहना है कि इसका असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है।
ये हैं छह प्रमुख मांगें
प्रदर्शनकारियों ने शासन के समक्ष 11 माह की पूर्णकालिक अवधि के लिए तत्काल नियुक्ति, 50 हजार रुपये प्रतिमाह एकमुश्त मानदेय, महिला अतिथि व्याख्याताओं को सवैतनिक मातृत्व अवकाश और 65 वर्ष की आयु तक सेवा सुरक्षा की मांग रखी।
इसके अलावा पीएससी सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा में 15 से 20 बोनस अंक देने तथा आयु सीमा में विशेष छूट की मांग भी की गई।

समान तिथि से नियुक्ति की मांग
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि प्रदेश के अनेक अतिथि व्याख्याता पिछले कई वर्षों से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद नियुक्ति और सेवा सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
उन्होंने प्रदेश के सभी शासकीय महाविद्यालयों में अतिथि व्याख्याताओं, ग्रंथपालों एवं क्रीड़ाधिकारियों की नियुक्ति एक समान तिथि से सुनिश्चित करने तथा उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की मांग की।
संघ ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। पदाधिकारियों ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय की शरण लेने से भी पीछे नहीं हटेंगे।