नई दिल्ली । कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा की लोकसभा में IIT मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटी को कथित तौर पर “गोमूत्र विशेषज्ञ” कहे जाने वाली टिप्पणी पर विवाद बढ़ता जा रहा है। इस टिप्पणी के विरोध में ऑनलाइन याचिका शुरू की गई है, जिसमें लोकसभा अध्यक्ष से मामले का संज्ञान लेने और प्रियंका गांधी से टिप्पणी वापस लेकर खेद व्यक्त करने की मांग की गई है।
वैज्ञानिक और अकादमिक समुदाय से समर्थन का दावा
याचिका में दावा किया गया है कि इसे 14 हजार से अधिक लोगों का समर्थन मिल चुका है। आयोजकों के मुताबिक, 38 से अधिक देशों में रह रहे भारतीय वैज्ञानिकों और अकादमिक समुदाय के सदस्यों ने भी अभियान का समर्थन किया है। हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से नहीं हो सकी है।
याचिका में कहा गया है कि सार्वजनिक बहस में असहमति व्यक्त करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन किसी शिक्षाविद् के प्रति व्यक्तिगत या अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
लोकसभा अध्यक्ष से दो प्रमुख मांगें
याचिका में लोकसभा अध्यक्ष से मुख्य रूप से दो मांगें रखी गई हैं—
- अकादमिक और वैज्ञानिक समुदाय की ओर से जताई गई चिंता का संज्ञान लिया जाए।
- संबंधित सांसद कथित टिप्पणी वापस लें और उसकी व्यक्तिगत प्रकृति के लिए खेद व्यक्त करें।
कौन हैं प्रो. वी. कामकोटी?
प्रो. वी. कामकोटी IIT मद्रास के निदेशक हैं और कंप्यूटर विज्ञान के क्षेत्र में विशेषज्ञता रखते हैं। उन्होंने IIT मद्रास से कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में MS और PhD की है और 2001 में संस्थान के फैकल्टी सदस्य के रूप में जुड़े थे। उनके काम में कंप्यूटर आर्किटेक्चर, सूचना सुरक्षा, VLSI डिजाइन और स्वदेशी प्रोसेसर विकास जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
वह भारत के स्वदेशी SHAKTI माइक्रोप्रोसेसर कार्यक्रम से भी जुड़े रहे हैं।
2025 के बयान से जुड़ा है विवाद
प्रियंका गांधी की टिप्पणी का संदर्भ प्रो. कामकोटी के जनवरी 2025 में दिए गए एक बयान से जोड़ा जा रहा है। उस दौरान उन्होंने गोमूत्र के कथित एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुणों तथा पाचन संबंधी समस्याओं में इसके उपयोग को लेकर दावे किए थे। उनके इन दावों को लेकर उस समय भी सार्वजनिक बहस हुई थी।
वहीं, लोकसभा में प्रियंका गांधी ने शिक्षा से जुड़े एक टास्क फोर्स की संरचना पर सवाल उठाते हुए कामकोटी की ओर इशारा करते हुए “गोमूत्र विशेषज्ञ” शब्द का इस्तेमाल किया था। इस पर राजनीतिक और अकादमिक हलकों में प्रतिक्रिया सामने आई।