रायपुर। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में प्रदेश स्तरीय बुनकर सम्मेलन एवं ग्रामोद्योग विभाग की स्वदेशी प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी शामिल हुए। उन्होंने छत्तीसगढ़ की समृद्ध हथकरघा परंपरा, बुनकरों और शिल्पकारों के योगदान को रेखांकित करते हुए उनके आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
हथकरघा कला छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान
वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि छत्तीसगढ़ की हथकरघा कला प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय हुनर की पहचान है। पीढ़ियों से बुनकर और शिल्पकार अपनी कला एवं कौशल के माध्यम से प्रदेश की संस्कृति को जीवंत बनाए हुए हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार बुनकरों के पारंपरिक कौशल को आधुनिक तकनीक, बेहतर बाजार और नए आर्थिक अवसरों से जोड़ने की दिशा में लगातार काम कर रही है। इसका उद्देश्य बुनकरों की आय में वृद्धि के साथ उन्हें अधिक आत्मनिर्भर बनाना है।
स्वदेशी प्रदर्शनी में दिखी छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति
कार्यक्रम के दौरान आयोजित स्वदेशी प्रदर्शनी में छत्तीसगढ़ के पारंपरिक हथकरघा एवं ग्रामोद्योग उत्पादों को प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी में प्रदेश की कला, संस्कृति और शिल्प कौशल की विविधता देखने को मिली।
प्रदर्शनी के माध्यम से स्थानीय बुनकरों और शिल्पकारों के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने तथा स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहित करने पर विशेष जोर दिया गया। इससे स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार मिलने के साथ बुनकरों और शिल्पकारों की आय बढ़ाने के अवसर भी उपलब्ध होंगे।
बुनकरों के आर्थिक सशक्तिकरण पर सरकार का फोकस
वित्त मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि पारंपरिक कला से जुड़े बुनकरों और शिल्पकारों को आधुनिक बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप अवसर मिलें। तकनीकी उन्नयन, बेहतर विपणन और आर्थिक सहायता के माध्यम से उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि हथकरघा केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की पहचान और विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके संरक्षण और संवर्धन के साथ बुनकर परिवारों के आर्थिक सशक्तिकरण पर भी सरकार प्राथमिकता से कार्य कर रही है।