रैंप पर उतरीं बदलाव की कहानियां: पुनर्वासित महिलाओं ने दुनिया को दिखाई अपनी नई पहचान

रायपुर |  राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में एक प्रेरणादायी दृश्य देखने को मिला। फैशन शो के दौरान पहली बार 9 पुनर्वासित महिलाओं ने रैंप वॉक कर अपने आत्मविश्वास और हुनर का प्रदर्शन किया।

कभी नक्सलवाद की राह पर रही ये महिलाएं अब समाज की मुख्यधारा से जुड़कर आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। उन्होंने फेमिना मिस इंडिया छत्तीसगढ़ 2026 अनुष्का सोन के साथ रैंप पर कदम रखा। जैसे ही महिलाएं आत्मविश्वास के साथ रैंप पर उतरीं, पूरा ऑडिटोरियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

मुख्यमंत्री सहित अतिथियों ने बढ़ाया उत्साह

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, मंत्री श्री लखन लाल देवांगन, मंत्री श्री गजेंद्र यादव और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने महिलाओं के इस प्रयास की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया।

उन्होंने कहा कि पुनर्वास के माध्यम से महिलाओं को नई दिशा मिल रही है और वे अपने हुनर व मेहनत से समाज में सम्मानजनक स्थान बना रही हैं।

पुनर्वास नीति से मिली नई राह

महिलाओं ने बातचीत में बताया कि उन्हें राज्य सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ मिल रहा है। सरकार के सहयोग से उन्हें अपने कौशल को निखारने और आगे बढ़ने का अवसर मिला है।

करीब एक महीने पहले तक इन महिलाओं में मंच पर आने को लेकर झिझक थी, लेकिन निरंतर प्रयास और प्रोत्साहन के बाद आज उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ रैंप पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।

हुनर और आत्मनिर्भरता बनी नई पहचान

यह आयोजन उन महिलाओं के जीवन में आए सकारात्मक बदलाव की मिसाल बनकर सामने आया। कभी जिनकी पहचान हिंसा और नक्सलवाद से जुड़ी थी, आज वही महिलाएं हथकरघा, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता के माध्यम से अपनी अलग पहचान बना रही हैं।

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का यह आयोजन केवल कला और संस्कृति का उत्सव नहीं, बल्कि बदलाव, पुनर्वास और सशक्तिकरण की प्रेरणादायी कहानी भी बन गया।

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