दिल्ली विधानसभा में पहले दिन बवाल, BJP-AAP आमने-सामने; आतिशी की अनुपस्थिति पर गरमाई सियासत

नई दिल्ली |  दिल्ली विधानसभा के मानसून सत्र का पहला दिन हंगामे के साथ शुरू हुआ। सदन में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायकों के बीच तीखी बहस देखने को मिली। बढ़ते विवाद को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने दोनों पक्षों के विधायकों से संयम बरतने और सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की।

कार्यवाही के दौरान AAP विधायक कुलदीप कुमार और BJP विधायक रवि नेगी अपनी सीटों से उठ गए और दोनों के बीच बहस शुरू हो गई। कुछ देर के लिए सदन में शोर-शराबे की स्थिति बन गई, जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने हस्तक्षेप कर स्थिति को शांत कराया।

BJP ने नेता प्रतिपक्ष आतिशी की मौजूदगी पर उठाया सवाल

सदन में मंत्री कपिल मिश्रा ने नेता प्रतिपक्ष आतिशी की अनुपस्थिति को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को विधानसभा की कार्यवाही में मौजूद रहना चाहिए।

कपिल मिश्रा ने आरोप लगाया कि आतिशी सदन में मौजूद नहीं हैं और वह गोवा में हैं। उनके इस बयान पर AAP विधायक संजीव झा ने आपत्ति जताई और कहा कि विपक्ष के नेताओं को लेकर इस तरह की टिप्पणी उचित नहीं है।

प्रवेश साहिब सिंह ने AAP पर साधा निशाना

मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने भी आतिशी की गैरमौजूदगी को लेकर विपक्ष पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष को सरकार के फैसलों पर आपत्ति है तो उसे विधानसभा में आकर अपनी बात रखनी चाहिए।

उन्होंने महिलाओं को आर्थिक सहायता योजना को लेकर विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले विपक्ष सवाल उठा रहा था कि योजना कब लागू होगी, लेकिन अब सरकार कदम उठा रही है तो उसे परेशानी हो रही है।

प्रवेश साहिब सिंह ने पिछली सरकार के कार्यकाल का जिक्र करते हुए विधानसभा की बैठकों और प्रश्नकाल को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सदन बहस और जवाबदेही का मंच है, इसलिए विपक्ष को यहां मौजूद रहकर जनता के मुद्दे उठाने चाहिए।

ताहिर हुसैन मामले पर चर्चा की मांग

विधानसभा में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता ताहिर हुसैन से जुड़े मामले को उठाने की मांग की। उन्होंने दिल्ली दंगों और IB अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या से जुड़े मामले पर सदन में चर्चा की मांग की।

सिरसा ने कहा कि दिल्ली से जुड़े गंभीर मामलों पर विधानसभा में चर्चा होना जरूरी है और ऐसे मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

मानसून सत्र के पहले ही दिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिली। आने वाले दिनों में भी सदन में कई मुद्दों को लेकर हंगामे के आसार हैं।

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