कश्मीर में सुरक्षा का नया मॉडल: प्रवासी मजदूरों की निगरानी और सुरक्षित ठहराव की व्यवस्था होगी मजबूत

श्रीनगर  |  जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में दो गैर-कश्मीरी मजदूरों की आतंकी हमले में हत्या के बाद प्रशासन ने प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर नई रणनीति तैयार की है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में घाटी में रह रहे प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश तय किए गए हैं।

प्रशासन से जुड़े सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा योजना के तहत घाटी में अलग-अलग और असुरक्षित स्थानों पर रह रहे प्रवासी मजदूरों को अब सुरक्षित क्लस्टर क्षेत्रों में रखा जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य है कि मजदूर एक जगह समूह में रहें, जिससे उनकी निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सके।

इसके अलावा घाटी में आने वाले हर नए प्रवासी मजदूर को अब संबंधित नजदीकी पुलिस थाने में अपनी जानकारी दर्ज करानी होगी। पुलिस द्वारा उनके रहने वाले स्थान का सुरक्षा सत्यापन किया जाएगा, जिसके बाद ही उन्हें वहां रहने की अनुमति दी जाएगी।

बडगाम और दक्षिण कश्मीर पर विशेष फोकस

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, कश्मीर घाटी में करीब 4 लाख प्रवासी मजदूर रहते हैं। इनमें बड़ी संख्या में उत्तर प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों के श्रमिक शामिल हैं, जो ईंट-भट्ठों, बागानों और निर्माण कार्यों में लगे हुए हैं।

घाटी में मौजूद सैकड़ों ईंट-भट्ठों में से अधिकतर मध्य कश्मीर के बडगाम और दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग, कुलगाम और पुलवामा क्षेत्रों में स्थित हैं। पुलिस का मानना है कि हर मजदूर को व्यक्तिगत सुरक्षा उपलब्ध कराना संभव नहीं है, इसलिए सुरक्षित क्लस्टर व्यवस्था अधिक प्रभावी विकल्प हो सकती है।

प्रवासियों पर बढ़े आतंकी हमले

अनुच्छेद 370 हटने के बाद से घाटी में गैर-स्थानीय नागरिकों को निशाना बनाकर किए जाने वाले आतंकी हमलों की घटनाएं सामने आती रही हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में आतंकियों ने कई प्रवासी मजदूरों को टारगेट किया है।

हाल ही में कुलगाम में आतंकियों ने दो गैर-कश्मीरी मजदूरों की पहचान पूछकर हत्या कर दी थी। इस घटना के बाद प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने नए कदम उठाने का फैसला किया है।

हाल में हुई आतंकी घटनाओं के बाद बढ़ी सतर्कता

जम्मू-कश्मीर में हाल के दिनों में सुरक्षा बलों ने आतंकी गतिविधियों के खिलाफ अभियान तेज किया है। राजौरी में नियंत्रण रेखा (LoC) के पास घुसपैठ की कोशिश को नाकाम किया गया, वहीं शोपियां में सुरक्षाबलों की कार्रवाई में लश्कर-ए-तैयबा के एक शीर्ष कमांडर के मारे जाने की जानकारी सामने आई थी।

प्रशासन का कहना है कि नई सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और आतंकियों की टारगेट किलिंग की रणनीति को विफल करना है।

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