मलेरिया से मौतों पर कांकेर प्रशासन सख्त, कलेक्टर ने स्वास्थ्य विभाग को हाई अलर्ट पर रहने के दिए निर्देश

रायपुर |  कांकेर जिले में मलेरिया से हुई मौतों के मामलों को लेकर जिला प्रशासन ने गंभीरता दिखाई है। कलेक्टर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर ने स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक लेकर अधिकारियों को हाई अलर्ट मोड में काम करने के निर्देश दिए हैं।

कलेक्टर ने कहा कि मलेरिया से जुड़े मामलों को गंभीरता से लेते हुए जमीनी स्तर पर नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाए। जिन क्षेत्रों में मलेरिया के अधिक मामले सामने आ रहे हैं, वहां लगातार निगरानी रखते हुए तत्काल आवश्यक कार्रवाई की जाए।

आश्रम-छात्रावासों में नियमित स्वास्थ्य जांच के निर्देश

बैठक में कलेक्टर ने जिले के सभी आश्रम-छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मलेरिया के साथ-साथ डायरिया, टायफाइड, पीलिया जैसी मौसमी और वेक्टरजनित बीमारियों के लक्षण मिलने पर स्वास्थ्य शिविर लगाकर विद्यार्थियों और शिक्षकों के सैंपल लिए जाएं।

उन्होंने आशा कार्यकर्ताओं (मितानिनों) की दवा पेटियों में आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने और मैदानी स्वास्थ्य कर्मचारियों को लगातार रिपोर्टिंग करने के निर्देश दिए।

लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई

कलेक्टर ने कहा कि राज्य शासन मलेरिया से हुई मौतों को लेकर गंभीर है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि अगले दो माह तक मलेरिया नियंत्रण अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ चलाया जाए।

उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में यदि मलेरिया से मौत के मामले सामने आते हैं और इसमें लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

19 हजार से ज्यादा सैंपल की जांच, 672 मरीज मिले

राष्ट्रीय वेक्टरजनित रोग एवं मौसमी बीमारियों की समीक्षा बैठक में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर.सी. ठाकुर ने बताया कि जुलाई-अगस्त में मलेरिया के मामले अधिक सामने आते हैं। इसके मद्देनजर आश्रम-छात्रावासों में रैपिड फीवर सर्वे (RFS) कराया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि अंतागढ़, भानुप्रतापपुर और कांकेर विकासखंड में अपेक्षाकृत अधिक मामले मिले हैं। अब तक 19,844 सैंपल की जांच की गई है, जिनमें 672 मलेरिया पॉजिटिव मरीज पाए गए हैं। सभी मरीजों का तत्काल उपचार किया गया है।

35 हजार मच्छरदानी का वितरण

मलेरिया नियंत्रण के लिए जिले में कई कदम उठाए जा रहे हैं। पायलट प्रोजेक्ट के तहत 35 हजार दवा लेपित मच्छरदानियों का वितरण किया गया है।

इसके अलावा घरों के आसपास जलभराव वाले स्थानों और पेयजल स्रोतों के पास दवा का छिड़काव कराया जा रहा है। डेंगू, जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) और फाइलेरिया की भी लगातार जांच की जा रही है।

स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि बुखार या बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं और समय पर उपचार लें।

 

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