नई दिल्ली। राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक 2026, जिसे ‘वंदे मातरम् बिल’ के नाम से भी जाना जा रहा है, गुरुवार को लोकसभा से पारित हो गया। विपक्ष के भारी हंगामे के बीच यह विधेयक ध्वनिमत से मंजूर किया गया। इससे पहले 27 जुलाई को यह विधेयक राज्यसभा से पारित हो चुका है।
दोनों सदनों से मंजूरी मिलने के बाद अब विधेयक को कानून का रूप देने के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद यह प्रभावी हो जाएगा।
वंदे मातरम् को मिलेगा कानूनी संरक्षण
इस विधेयक का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ की तरह कानूनी संरक्षण प्रदान करना है। प्रस्तावित प्रावधानों के तहत यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रीय गीत के गायन में बाधा डालता है या उसका अपमान करता है, तो उसे दंडनीय अपराध माना जाएगा।
विधेयक के अनुसार दोषी पाए जाने पर अधिकतम 3 साल तक की सजा, जुर्माना या दोनों का प्रावधान किया जा सकता है।
सरकारी कार्यक्रमों में गायन का प्रस्ताव
प्रस्तावित नियमों के तहत सरकारी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के गायन को अनिवार्य किए जाने का प्रावधान है। इसके अलावा स्कूलों में प्रार्थना से पहले इसके गायन का भी प्रस्ताव रखा गया है।
नियमों में गीत को निर्धारित समय सीमा में और अनुशासित तरीके से प्रस्तुत करने का उल्लेख है। गायन के दौरान सावधान मुद्रा बनाए रखने का भी प्रावधान प्रस्तावित है।
संसद में हुआ जोरदार हंगामा
विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने जमकर विरोध किया। हंगामे के बीच सरकार ने विधेयक को लोकसभा में पारित करा लिया। लोकसभा अध्यक्ष ने कार्यवाही को 31 जुलाई सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।
अब राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह विधेयक कानून बन जाएगा और ‘वंदे मातरम्’ के सम्मान से जुड़े नए कानूनी प्रावधान लागू हो सकेंगे।