नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जबकि डब्ल्यूटीआई (WTI) और मर्बन क्रूड भी कमजोर स्तर पर कारोबार कर रहे हैं। तेल की कीमतों में आई इस गिरावट से भारत जैसे तेल आयातक देशों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
गुरुवार के कारोबार में ब्रेंट क्रूड करीब 70.60 डॉलर प्रति बैरल, WTI लगभग 67 डॉलर और मर्बन क्रूड करीब 65 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार करता दिखा। कुछ सप्ताह पहले अमेरिका-ईरान तनाव के कारण कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया था, लेकिन अब हालात सामान्य होने से कीमतों में तेजी से नरमी आई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में सकारात्मक प्रगति तथा पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका घटी है। इसके चलते बाजार में जोखिम प्रीमियम कम हुआ और कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ा।
इसके अलावा, तेल उत्पादक देशों के समूह ओपेक प्लस (OPEC+) द्वारा उत्पादन बढ़ाने की रणनीति भी कीमतों में गिरावट की बड़ी वजह मानी जा रही है। संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब से अधिक आपूर्ति की उम्मीद ने वैश्विक बाजार में तेल की उपलब्धता को लेकर चिंताओं को कम किया है।
हालांकि दुनिया की करीब 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति के लिए अहम होर्मुज जलडमरूमध्य अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुआ है, लेकिन निवेशकों को उम्मीद है कि क्षेत्र में हालात धीरे-धीरे बेहतर होंगे। इसी भरोसे के चलते बाजार में कीमतों में नरमी बनी हुई है।
अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रहती हैं, तो भारत का आयात बिल कम हो सकता है। इससे पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव घटेगा, महंगाई नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी और देश की अर्थव्यवस्था को भी सकारात्मक समर्थन मिलने की संभावना है।