हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, रद्द प्रमोशन की तारीख से नहीं मिलेगा शिक्षकों को वरिष्ठता लाभ

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों की वरिष्ठता को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी कर्मचारी का प्रारंभिक पदोन्नति आदेश अनियमितताओं के कारण रद्द हो जाता है, तो बाद में नए सिरे से मिले प्रमोशन के आधार पर पुराने निरस्त आदेश की तारीख से वरिष्ठता का लाभ नहीं दिया जा सकता।

हाईकोर्ट ने सूरजपुर जिले के पांच मिडिल स्कूल प्रधानपाठकों द्वारा दायर याचिका को आधारहीन मानते हुए खारिज कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति बिभू दत्त गुरु की सिंगल बेंच ने जारी किया।

मामले के अनुसार याचिकाकर्ता शोभनाथ चौबे, अशोक कुमार उपाध्याय, दिनेश कुमार द्विवेदी, संजय कुमार त्रिपाठी और दिनेश कुमार कौशिक को वर्ष 2012 में शासकीय पूर्व माध्यमिक शालाओं में प्रधानपाठक पद पर पदोन्नति दी गई थी।

बाद में इन पदोन्नतियों में अनियमितता का आरोप लगने के बाद विभाग ने प्रारंभिक पदोन्नति आदेश रद्द कर दिया। इसके खिलाफ शिक्षकों ने हाईकोर्ट का रुख किया और विभागीय कार्रवाई को चुनौती दी।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने माना कि विभाग द्वारा की गई कार्रवाई उचित थी। कोर्ट ने कहा कि जब पुराना पदोन्नति आदेश ही निरस्त हो चुका है, तो उसकी तारीख से वरिष्ठता का दावा नहीं किया जा सकता।

इसके बाद हाईकोर्ट ने सभी पांचों प्रधानपाठकों की याचिका खारिज कर दी। फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि अनियमित प्रमोशन रद्द होने के बाद नए प्रमोशन आदेश की तारीख से ही सेवा लाभों की गणना की जाएगी।

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