कैदी को हाईकोर्ट से मिली अनोखी राहत: पुलिस अभिरक्षा में बहन की शादी में शामिल होने की अनुमति

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक मानवीय फैसला सुनाते हुए डकैती और साजिश जैसे गंभीर मामलों में 10 साल की सजा काट रहे कैदी को उसकी बहन की शादी में शामिल होने की अनुमति दी है। हालांकि कोर्ट ने अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया और स्पष्ट किया कि कैदी को पूरी तरह रिहा नहीं किया जाएगा, बल्कि वह पुलिस अभिरक्षा में शादी समारोह में शामिल होगा।

जानकारी के अनुसार, भिलाई के सुपेला कृष्णानगर निवासी मनीष बंसोर को दुर्ग की विशेष अदालत ने 18 नवंबर 2025 को दोषी ठहराया था। उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी के तहत 7 साल और धारा 397 के तहत 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है।

मनीष ने हाईकोर्ट में अंतरिम जमानत की याचिका दायर करते हुए बताया कि उसकी सगी बहन की शादी है और परिवार में कोई अन्य भाई नहीं है जो पारंपरिक रस्में निभा सके। इस पर राज्य सरकार ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी गंभीर और हिंसक अपराधों में दोषी है, इसलिए उसे खुला छोड़ना उचित नहीं होगा।

हालांकि, सरकार ने यह सुझाव दिया कि यदि अदालत उचित समझे तो कैदी को पुलिस सुरक्षा में शादी की रस्मों में शामिल कराया जा सकता है। अदालत ने इसी सुझाव को स्वीकार करते हुए निर्देश दिया कि संबंधित जेल अधीक्षक और दुर्ग पुलिस अधीक्षक आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था के साथ कैदी को 30 जून को भिलाई स्थित विवाह स्थल ले जाएं।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रस्में पूरी होते ही कैदी को तुरंत वापस जेल भेज दिया जाएगा। यह फैसला मानवीय और सामाजिक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए दिया गया है।

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