AFI की बड़ी चूक से 18 वर्षीय एथलीट का सपना टूटा, ट्रायल्स में विवाद से मचा हंगामा

भुवनेश्वर/नई दिल्ली |  इंटर स्टेट सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 400 मीटर हर्डल्स स्पर्धा के दौरान एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (AFI) की तकनीकी चूक ने 18 वर्षीय तमिलनाडु की एथलीटर हर्षिता  का एशियन गेम्स ट्रायल्स में बड़ा अवसर छीन लिया।

घटना के अनुसार, हरशिता ने 400 मीटर हर्डल्स की पहली हीट में शानदार प्रदर्शन करते हुए 1:01.03 सेकेंड का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय दर्ज किया था और वह तीसरे स्थान पर रहीं। लेकिन रेस के दौरान लेन 8 में 10 की जगह केवल 9 हर्डल लगाए जाने की गंभीर गलती सामने आई।

तकनीकी चूक बनी विवाद की वजह

रेस के दौरान चौथा हर्डल पार करने के बाद हरशिता को अपनी लेन में एक हर्डल गायब मिला, जिसके चलते उन्हें कुछ क्षणों के लिए अपनी लेन छोड़नी पड़ी। बाद में जांच में तकनीकी अधिकारियों की गलती सामने आई, लेकिन इसके बावजूद उनका रिकॉर्ड अमान्य कर दिया गया।

दोबारा दौड़ का फैसला और निराशाजनक परिणाम

विवाद के बाद आयोजकों ने हर्षिता  को अकेले टाइम ट्रायल के रूप में दोबारा मौका दिया, जिसमें उन्हें 1:02 सेकेंड के अंदर दौड़ पूरी करनी थी। लगातार रेस और मानसिक दबाव के चलते वह 1:02.54 सेकेंड का समय ही निकाल सकीं और फाइनल क्वालिफिकेशन से चूक गईं।

एथलीट पर सवाल या सिस्टम पर?

इस पूरे मामले ने खेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एथलीट और कोचिंग समुदाय का कहना है कि तकनीकी गलती के बावजूद खिलाड़ी को इसकी सजा देना अनुचित है।

हर्षिता  , जिन्होंने पिछले वर्ष U-23 चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता था, ने इस घटना पर निराशा जताई और कहा कि उन्हें उचित अवसर नहीं मिला।

AFI पर उठे सवाल

इस विवाद के बाद एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया पर ट्रैक सेटअप और तकनीकी निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की चूक से न केवल एथलीट का मनोबल टूटता है, बल्कि चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी असर पड़ता है।

पूरा मामला अब खेल जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है, और एथलीट समुदाय ने निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

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