नई दिल्ली। होर्मुज जलडमरूमध्य में एक कार्गो जहाज पर हुए ड्रोन हमले के बाद समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। अमेरिका ने इस हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया है। हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने 11 हजार से ज्यादा फंसे नाविकों को निकालने का रेस्क्यू अभियान अस्थायी रूप से रोक दिया है।
जानकारी के अनुसार, ओमान के तट के पास सिंगापुर के झंडे वाले कार्गो जहाज एवर लवली पर ड्रोन हमला हुआ। हालांकि, इस घटना में किसी नाविक की मौत या गंभीर चोट की खबर सामने नहीं आई है।
रेस्क्यू ऑपरेशन पर लगा ब्रेक
IMO के महासचिव आर्सेनियो डोमिंगेज ने बताया कि जिस जहाज पर हमला हुआ, वह फंसे हुए नाविकों की निकासी योजना का हिस्सा नहीं था। लेकिन घटना के बाद सुरक्षा कारणों से अभियान रोकने का फैसला लिया गया।
उन्होंने कहा कि जब तक इवैक्युएशन लिस्ट में शामिल जहाजों की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट भरोसा नहीं मिलता, तब तक अभियान दोबारा शुरू नहीं किया जाएगा।
हजारों नाविक फंसे हुए हैं
अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट और आसपास के क्षेत्र में 20 हजार से ज्यादा नाविक अलग-अलग जहाजों पर फंसे हुए हैं। इनमें से करीब 11 हजार नाविकों को सुरक्षित निकालने के लिए विशेष योजना बनाई गई थी।
यह अभियान संयुक्त राष्ट्र, ओमान और कई अन्य देशों के सहयोग से चलाया जा रहा था, जिसका उद्देश्य सुरक्षा कारणों से रुके जहाजों को सुरक्षित तरीके से होर्मुज स्ट्रेट पार कराना था।
ईरान ने नहीं की पुष्टि
अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि यह हमला ईरानी ड्रोन से किया गया। हालांकि, ईरान की ओर से अभी तक इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
ड्रोन हमले के बाद होर्मुज स्ट्रेट में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है और समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जताई जा रही है।