नई दिल्ली। दिल्ली में बिजली वितरण कंपनियों के वित्तीय ऑडिट को लेकर लंबे समय से चली आ रही कानूनी और प्रशासनिक खींचतान पर अब महत्वपूर्ण मोड़ आ गया है। दिल्ली हाई कोर्ट के हालिया फैसले के बाद बिजली कंपनियों के CAG ऑडिट की प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने BSES राजधानी पावर लिमिटेड और BSES यमुना पावर लिमिटेड के CAG ऑडिट के दिल्ली सरकार के प्रस्ताव में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह मामला प्रारंभिक स्तर पर है और इस चरण में कंपनियों की आपत्तियां स्वीकार नहीं की जा सकतीं।
सरकार की ओर से जारी 6 जून के नोटिस के तहत नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) को बिजली वितरण कंपनियों के खातों की जांच सौंपने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। अदालत ने कहा कि संबंधित कंपनियों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा, जिसके बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।
इस फैसले के बाद अब 13 साल से लंबित CAG ऑडिट की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ माना जा रहा है। इस मुद्दे की शुरुआत उस समय हुई थी जब तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बिजली कंपनियों के खातों की जांच CAG से कराने की पहल की थी।
वहीं मौजूदा सरकार के दौरान इस दिशा में प्रक्रिया को फिर से सक्रिय किया गया है। सरकार का कहना है कि ऑडिट से बिजली वितरण कंपनियों के वित्तीय कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा सुनिश्चित होगी।
दिल्ली सरकार की ओर से इस फैसले को बड़ी प्रशासनिक जीत के रूप में देखा जा रहा है। ऊर्जा विभाग का कहना है कि CAG ऑडिट से कंपनियों के कामकाज और वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच संभव होगी।
अब इस मामले की अगली सुनवाई और प्रशासनिक प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह फैसला दिल्ली के बिजली सेक्टर में बड़े सुधारों की दिशा तय कर सकता है।