दिल्ली में PUC नियमों में बदलाव का प्रस्ताव, वाहन की उम्र के आधार पर तय होगी जांच अवधि

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए वाहन प्रदूषण जांच (PUC) नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी की जा रही है। रेखा गुप्ता सरकार इस नई व्यवस्था को लागू करने पर विचार कर रही है, जिसके तहत अब वाहनों की उम्र के अनुसार PUC जांच की अवधि तय होगी।

प्रस्तावित नियमों के अनुसार, नए निजी वाहनों को हर तीन साल में एक बार PUC कराने की सुविधा मिल सकती है, जबकि 6 से 10 साल पुराने वाहनों के लिए यह जांच हर साल अनिवार्य होगी। वहीं 10 साल से अधिक पुराने वाहनों के लिए सख्त नियम लागू किए जाने की संभावना है, जिसके तहत हर छह महीने में PUC प्रमाणपत्र लेना होगा।

सूत्रों के अनुसार, BS-VI मानक वाले वाहन अपेक्षाकृत कम प्रदूषण फैलाते हैं, इसलिए इन्हें कुछ मामलों में राहत देने पर विचार किया जा रहा है। इसके विपरीत BS-IV और पुराने मानकों वाले वाहनों के लिए जांच की आवृत्ति बढ़ाई जा सकती है। मार्च 2020 से पहले के BS-IV वाहनों को हर छह महीने में PUC कराना पड़ सकता है, जबकि BS-III और उससे पुराने वाहनों के लिए यह अवधि तीन महीने तक सीमित किए जाने का प्रस्ताव है।

वाणिज्यिक वाहनों के लिए भी अलग नियम प्रस्तावित किए गए हैं। BS-VI कॉमर्शियल वाहनों को शुरुआती वर्षों में कम बार PUC कराना होगा, लेकिन छह साल से अधिक पुराने वाहनों के लिए वार्षिक जांच अनिवार्य हो सकती है।

सरकार की योजना में यह भी शामिल है कि बिना वैध PUC प्रमाणपत्र वाले वाहनों को ईंधन नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा पार्किंग शुल्क बढ़ाने, भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध और कार्यालय समय में बदलाव जैसे कदम भी विंटर एक्शन प्लान के तहत शामिल किए जा रहे हैं।

दिल्ली में लगातार खराब होती वायु गुणवत्ता को देखते हुए सरकार इन कदमों को ‘प्रोएक्टिव विंटर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट फ्रेमवर्क’ के तहत लागू करने की तैयारी में है। इन प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य प्रदूषण नियंत्रण प्रणाली को अधिक प्रभावी और सख्त बनाना है।

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