पटना। NEET UG री-एग्जाम के दौरान बिहार में एक बड़े सॉल्वर गैंग का खुलासा हुआ है। लखीसराय पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 24 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें 5 मेडिकल छात्र और बायोमैट्रिक कंपनी के 14 कर्मचारी शामिल हैं।
आरोप है कि गिरोह ने असली अभ्यर्थियों की जगह फर्जी सॉल्वर्स को परीक्षा में बैठाने की साजिश रची थी। इसके लिए परीक्षा केंद्रों की बायोमैट्रिक सत्यापन व्यवस्था में सेंध लगाई गई।
बायोमैट्रिक सिस्टम में मिलीभगत का खुलासा
जांच में सामने आया कि बायोमैट्रिक सत्यापन से जुड़े कर्मचारियों की मदद से नकली परीक्षार्थियों को वास्तविक उम्मीदवारों की जगह परीक्षा केंद्र में प्रवेश दिलाया गया।
पुलिस के अनुसार, तीन परीक्षा केंद्रों से 7 सॉल्वर और 14 बायोमैट्रिक कर्मचारियों सहित कुल 24 लोगों को पकड़ा गया है।
30 लाख रुपये तक की डील का आरोप
शुरुआती जांच में पता चला है कि असली परीक्षार्थियों की जगह दूसरे लोगों को परीक्षा दिलाने के लिए लाखों रुपये में सौदा किया गया था। पुलिस अब पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।
मास्टरमाइंड की तलाश जारी
जांच एजेंसियों के मुताबिक इस रैकेट का मुख्य संचालक मेडिकल छात्र रविशंकर बताया जा रहा है, जबकि मास्टरमाइंड के रूप में अर्पित राज का नाम सामने आया है। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि गिरोह का नेटवर्क कितने राज्यों तक फैला है।
पुलिस और जांच एजेंसियां पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही हैं।