नई दिल्ली | दिल्ली सरकार की सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (Central Procurement Agency) से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले की जांच अब और व्यापक हो गई है। एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने अब जांच का दायरा बढ़ाते हुए तकनीकी स्पेसिफिकेशन तैयार करने वाली समितियों और उनमें शामिल डॉक्टरों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं।
सूत्रों के अनुसार, जांच अब केवल खरीद प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहकर तकनीकी स्तर तक पहुंच चुकी है।
19 विभागों के डॉक्टर जांच के घेरे में
जानकारी के मुताबिक, स्वास्थ्य विभाग के करीब 19 अलग-अलग विभागों—जैसे एनेस्थीसिया, पैथोलॉजी, रेडियोलॉजी, गायनेकोलॉजी, कार्डियोलॉजी समेत कई विशेषज्ञ विभागों के डॉक्टर—अब जांच के दायरे में हैं।
इन डॉक्टरों पर आरोप है कि वे मेडिकल उपकरणों के लिए तकनीकी स्पेसिफिकेशन तय करने वाली कमेटियों का हिस्सा थे, जिनकी भूमिका अब संदिग्ध मानी जा रही है।
स्पेसिफिकेशन प्रक्रिया पर उठे सवाल
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या उपकरणों की तकनीकी शर्तें इस तरह तैयार की गईं जिससे प्रतिस्पर्धा सीमित हो और कुछ चुनिंदा वेंडर्स को फायदा मिला।
सूत्रों के मुताबिक, कुछ मामलों में वेंडर्स को पहले से स्पेसिफिकेशन की जानकारी मिलने और उनके अनुरूप तकनीकी मानक तय किए जाने के आरोप भी सामने आए हैं।
वेंडर्स से भी पूछताछ जारी
एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) अब उन वेंडर्स से भी पूछताछ कर रही है, जिन्हें इन कथित प्रक्रियाओं से लाभ मिला था। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या टेंडर प्रक्रिया से पहले किसी तरह की गोपनीय जानकारी साझा की गई थी।
सरकारी खरीद प्रक्रिया पर नजर
सरकारी खरीद प्रक्रिया में स्पेसिफिकेशन कमेटी, तकनीकी मूल्यांकन समिति और वित्तीय मूल्यांकन समिति जैसी कई परतें होती हैं, जिनका उद्देश्य पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना है।
जांच एजेंसियों का फोकस अब इस बात पर है कि क्या इन प्रक्रियाओं के दौरान नियमों का पालन किया गया या कहीं किसी स्तर पर पक्षपात हुआ।
जांच का दायरा बढ़ने के संकेत
ACB की इस कार्रवाई से साफ है कि CPA मामले की जांच अब केवल प्रशासनिक स्तर तक सीमित नहीं रही, बल्कि तकनीकी और विशेषज्ञ निर्णयों की प्रक्रिया तक पहुंच गई है, जिससे आने वाले दिनों में और बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।