रायपुर। छत्तीसगढ़ को कुपोषण मुक्त बनाने की दिशा में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में विभाग की संचालक डॉ. रेणुका श्रीवास्तव ने मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के विभिन्न आंगनवाड़ी केंद्रों का निरीक्षण कर सेवाओं की जमीनी स्थिति का मूल्यांकन किया।
निरीक्षण के दौरान बच्चों के पोषण स्तर, आंगनवाड़ी केंद्रों की व्यवस्थाओं और शासन की योजनाओं के प्रभाव की समीक्षा की गई। डॉ. श्रीवास्तव ने बच्चों के वजन और ऊंचाई मापन की प्रक्रिया का सत्यापन किया तथा टेक होम राशन (टीएचआर) की गुणवत्ता, पोषण वाटिकाओं और केंद्रों में उपलब्ध सुविधाओं का अवलोकन किया।
उन्होंने गंभीर कुपोषित (एसएएम) और पहले कुपोषण से प्रभावित रहे बच्चों की माताओं से संवाद कर अतिरिक्त टेक होम राशन (ए-टीएचआर) के प्रभाव की जानकारी ली। माताओं ने बताया कि नियमित ए-टीएचआर और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के मार्गदर्शन से बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण स्थिति में सुधार हुआ है।
संचालक ने सक्षम आंगनवाड़ी केंद्रों में पोषण वाटिकाओं को और विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर पौष्टिक खाद्य सामग्री की उपलब्धता बढ़ाने से बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य में बेहतर परिणाम मिलेंगे।
निरीक्षण के दौरान सखी-वन स्टॉप सेंटर मोहला का भी जायजा लिया गया। यहां महिलाओं को दी जा रही सहायता, संरक्षण और परामर्श सेवाओं की समीक्षा की गई।
महिला एवं बाल विकास विभाग के अनुसार, ऐसे निरीक्षणों का उद्देश्य योजनाओं के वास्तविक क्रियान्वयन को मजबूत करना और बच्चों को बेहतर पोषण, स्वास्थ्य एवं सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है।