नई दिल्ली: यमुना बाजार इलाके में लगभग 310 घरों को खाली करने का नोटिस जारी किया गया है, जिसमें निवासियों को 15 दिनों के भीतर अपने घर छोड़ने का अल्टीमेटम दिया गया है। प्रशासन ने बताया है कि यह क्षेत्र यमुना नदी के किनारे आने वाले ‘नो डेवलपमेंट जोन’ (O Zone) में आता है, जहां किसी भी प्रकार का स्थायी निर्माण नियमों के खिलाफ है।
सरकार का दावा
सरकार और दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी (डीडीए) का कहना है कि नदी किनारे अनियंत्रित निर्माण से पर्यावरणीय संकट और बाढ़ का जोखिम बढ़ता है। प्रशासन ने कहा कि नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बाधा, भूमि कटाव और बाढ़ सुरक्षा के लिहाज से यह कदम आवश्यक है। इसी कारण यमुना बाजार कॉलोनी को O Zone मानते हुए खाली करने का आदेश दिया गया है।
स्थानीय निवासियों की प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों ने नोटिस का विरोध किया है। उनका कहना है कि उन्हें पहले से ही दिल्ली हाईकोर्ट से स्टे मिला हुआ है, इसलिए प्रशासन का नोटिस सवालों के घेरे में है। कई परिवारों ने दावा किया कि उनका निवास इस इलाके में ब्रिटिश शासनकाल से है और वे यहां 7-8 पीढ़ियों से रह रहे हैं।
निवासियों ने कहा कि अचानक घर खाली करने का आदेश उनके लिए बड़ी समस्या बन गया है, क्योंकि उनकी आजीविका, सामाजिक जीवन और धार्मिक परंपराएं इसी इलाके से जुड़ी हैं। उन्होंने प्रशासन से
बातचीत और पुनर्वास की मांग की है। अगर समाधान नहीं निकला, तो वे कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की भी चेतावनी दे रहे हैं।
O Zone क्या है?
O Zone वे क्षेत्र होते हैं जो नदी किनारे या बाढ़ संभावित इलाकों में आते हैं। इन जगहों पर स्थायी निर्माण पर रोक होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इन इलाकों में निर्माण बाढ़, भूमि कटाव और
पर्यावरणीय असंतुलन का खतरा बढ़ाता है।
निष्कर्ष
यमुना बाजार कॉलोनी के निवासियों और प्रशासन के बीच यह मुद्दा अब संवेदनशील स्थिति में है। जबकि सरकार का तर्क पर्यावरण और सुरक्षा पर आधारित है, स्थानीय लोग सामाजिक, ऐतिहासिक और धार्मिक जुड़ाव के आधार पर पुनर्वास की मांग कर रहे हैं।