3200 से अधिक मरीजों ने उठाया निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ
रायपुर। राजधानी रायपुर के समीप स्थित ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देने का सराहनीय प्रयास सामने आया है। पचेड़ा स्थित माँ पद्मावती हॉस्पिटल (श्री बालाजी ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स एंड कॉलेजेस की इकाई) द्वारा आयोजित 15 दिवसीय निःशुल्क महा-स्वास्थ्य शिविर ग्रामीणों के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं हो रहा है। अस्पताल की प्रथम वर्षगांठ के अवसर पर लगाए गए इस शिविर में अब तक 3200 से अधिक मरीजों ने विभिन्न प्रकार की जांच एवं उपचार का लाभ उठाया है।
इस महा-शिविर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ मरीजों को पंजीकरण से लेकर जांच, दवाइयों और यहां तक कि जटिल ऑपरेशनों तक के लिए कोई शुल्क नहीं देना पड़ रहा है। अस्पताल प्रबंधन ने पूरे शिविर को ‘कैश काउंटर मुक्त’ रखा है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को बड़ी राहत मिल रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां सामान्यतः स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी लोगों को भारी खर्च उठाना पड़ता है, वहां इस तरह की पहल न केवल सराहनीय है, बल्कि समाज के लिए प्रेरणादायक भी है।
शिविर के तीसरे दिन की बात करें तो स्वास्थ्य सेवाओं का व्यापक स्तर पर लाभ उठाया गया। लगभग 340 से अधिक लोगों ने रक्त जांच कराई, 20 मरीजों ने सोनोग्राफी, 18 मरीजों ने सीटी स्कैन, 155 मरीजों ने ईसीजी तथा 23 मरीजों ने इको जांच करवाई। यह आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि ग्रामीणों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ रही है और उन्हें जब सुविधाएं सुलभ रूप से मिलती हैं, तो वे उनका भरपूर उपयोग भी करते हैं।
आमतौर पर एमआरआई, सीटी स्कैन और अन्य पैथोलॉजी जांचों के लिए ग्रामीणों को शहरों का रुख करना पड़ता था, जहां उन्हें हजारों रुपये खर्च करने पड़ते थे। कई बार आर्थिक तंगी के कारण लोग अपनी जांच और इलाज को टाल देते थे, जिससे बीमारियां गंभीर रूप ले लेती थीं। लेकिन इस महा-शिविर ने इस समस्या का प्रभावी समाधान प्रस्तुत किया है। अब ग्रामीणों को अपने ही क्षेत्र में आधुनिक मशीनों और विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा मुफ्त जांच एवं उपचार की सुविधा मिल रही है।
पचेड़ा में स्थित 750 बिस्तरों वाला यह सर्व-सुविधायुक्त अस्पताल अब ग्रामीणों के लिए एक भरोसेमंद स्वास्थ्य केंद्र बनकर उभर रहा है। यहां न केवल आधुनिक उपकरण उपलब्ध हैं, बल्कि अनुभवी चिकित्सकों की टीम भी लगातार मरीजों की सेवा में जुटी हुई है। शिविर के माध्यम से अस्पताल प्रबंधन ने यह संदेश दिया है कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं केवल शहरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि गांव-गांव तक पहुंचनी चाहिए।
शिविर में पहुंचे ग्रामीणों ने भी इस पहल की जमकर सराहना की है। एक लाभार्थी ग्रामीण ने बताया, “हमें पहले शहर के बड़े अस्पतालों में जाने से डर लगता था कि बहुत पैसा लगेगा, लेकिन माँ पद्मावती हॉस्पिटल ने हमारे गांव के पास ही मुफ्त में बड़े-बड़े टेस्ट करके हमें नया जीवन दिया है।” ऐसे अनेक अनुभव इस शिविर की सफलता की कहानी बयां करते हैं।
इस महा-शिविर ने न केवल हजारों लोगों को राहत पहुंचाई है, बल्कि स्वास्थ्य के प्रति एक सकारात्मक सोच भी विकसित की है। समय पर जांच और उपचार से गंभीर बीमारियों को रोका जा सकता है, यह संदेश भी ग्रामीणों तक प्रभावी रूप से पहुंच रहा है। साथ ही, यह पहल सामाजिक दायित्व की भावना को भी मजबूत करती है, जहां संस्थाएं आगे बढ़कर समाज के कमजोर वर्गों के लिए कार्य कर रही हैं।
कुल मिलाकर, माँ पद्मावती हॉस्पिटल का यह निःशुल्क महा-स्वास्थ्य शिविर ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य क्रांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है। यदि इसी तरह की पहल निरंतर जारी रहती है, तो आने वाले समय में ग्रामीण भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल सकता है।