शिवरीनारायण –मंदिरों की नगरी व आसन द्वारा घोषित टेंपल सिटी शिवरीनारायण छ.ग. प्रदेश की महत्वपूर्ण आध्यात्मिक, ऐतिहासिक, धार्मिक स्थल होने के साथ ही यह महत्वपूर्ण व्यापारिक नगरी है तथा छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा मंदिर यही पर भगवान श्री शिवरीनारायण जी की है। जहां काफी दूर-दूर से लोग व्यापार, पर्यटन तथा मंदिरों की दर्शनार्थ आते हैं। रामायण कालीन शबरी की इस पावन जन्मभूमि तथा विश्व विधाता स्वामी जगन्नाथ जी की मूलभूमि को छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा श्री राम वन गमन पर्यटन परिपथ का मुख्य केंद्र स्वरूप विकसित किया जा रहा है यहां रेलवे स्टेशन भी प्रस्तावित है। प्रदेश के ऐसे महत्वपूर्ण धार्मिक पावन स्थल के सर्वांगीण विकास हेतु छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार ने मास्टर प्लान लागू करने का अभूतपूर्व व महती निर्णय लिया है। विविधताओं से ओतप्रोत इस पावन धरा में प्रतिदिन दर्शनार्थियों, सैलानी पर्यटकों, व्यापारियों तथा आम जनों की काफी भीड़ रहती है। ऐसे महत्वपूर्ण स्थल में शासकीय भूमि का अभाव है। शासन व नगर पंचायत को विभिन्न विकास एवं जन कल्याणकारी कार्य हेतु भूमि की आवश्यकता होती है और लोग यहां करोड़ों-अरबों रुपए की बेशकीमती शासकीय भूमि,सेवा भूमियों पर लगातार अवैध कब्जा कर आलीशान दुकान और मकान बनाकर नगर विकास को प्रभावित कर रहे हैं। नगर के स्वामी आत्मानंद हायर सेकेण्डरी स्कूल, मवेशी बाजार, आम बाजार, मुख्य मार्ग बॉम्बे मार्केट के आसपास, पुराना शासकीय अस्पताल के पास,थाना और रेस्ट हाउस के आसपास, पूल रोड पुराना तहसील कार्यालय के सामने तथा नगर के अनेक महत्वपूर्ण स्थलों की बेशकीमती शासकीय भूमियों पर सैकड़ों मकान-दुकानें बन गई है। ऐसे अवैध निर्माण करने वालों में नगर वासियों सहित अन्य गांव के लोग भी हैं,जो छोटी-मोटी नौकरी व व्यवसाय करते हैं। ऐसे लोगों के लिए यह नगर चारागाह बना हुआ है। संबंधित अधिकारी गण इन पर यथासमय ठोस कार्रवाई नहीं करने का ही यह नतीजा है कि यहां सास की एवं सेवा भूमियों पर अवैध निर्माण व अतिक्रमण बदस्तूर जारी है और इन अधिकारियों के ढुलमुल रवैए व अवैध कब्जा- निर्माण करने वालों से पैसे की लेन देन से अवैध निर्माण करने वालों को लगातार प्रोत्साहन मिल रहा है साथ ही उनकी हौसले बुलंद हैं। बता दें,नगर में बहुचर्चित अन्नू उर्फ आनंद केडिया के अवैध आलीशान दुकान-भवन प्रकरण में तत्कालीन न्यायालय तहसीलदार शिवरीनारायण अविनाश चौहान ने शिवरीनारायण नगर पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम भोगहापारा की शासकीय भूमि खसरा नंबर 629 के रकबा 70 गुणा 30 वर्ग कड़ी भूमि में आनंद केडिया के द्वारा अप्राधिकृत कब्जा किये जाने के विरुद्ध बेदखली आदेश जारी कर शासकीय भूमि पर अप्राधिकृत कब्जा होने के कारण आर्थिक दंड की राशि दस हजार रुपए अधिरोपित किये थे और न्यायलय द्वारा जारी बेदखली वारंट पाते ही 7 दिवस के भीतर अपनी वाद भूमि से अपना अवैध अतिक्रमण स्वत: हटाने एवं अधिरोपित की राशि बैंक चलान के माध्यम से अथवा तहसील न्यायालय शिवरीनारायण को नगद राशि अदा करने सुनिश्चित करने का फरमान जारी किए थे। तहसीलदार के इस आदेश को आनंद केडिया उर्फ अन्नू केडिया ने चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय बिलासपुर में याचिका दायर की। जिस पर उच्च न्यायालय बिलासपुर के आदेश दिनांक 25.07.2025 में सीजीएलआरसी की धारा 44 (1) के तहत याचिकाकर्ता के लिए वैकल्पिक उपाय उपलब्ध है, इसलिए याचिकाकर्ता को इस आदेश की प्रति प्राप्त होने की तारीख से 15 दिनों की अवधि के भीतर संहिता 1959 की धारा 44(1)के तहत अपील दायर करने की स्वतंत्रता दी गई और ऐसी अपील दायर होने पर संबंधित एसडीओ ( राजस्व) इस न्यायालय द्वारा दी गई टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए और याचिकाकर्ता को सुनवाई का उचित अवसर प्रदान करने के बाद उनके गुण-दोष के आधार पर अपील दायर करने की तारीख से 45 दिनों की अवधि के भीतर उस पर निर्णय लेंगे। अपील पर निर्णय होने तक यह निर्देश दिया जाता है कि याचिकाकर्ता के विरुद्ध कोई भी बलपूर्वक कदम नहीं उठाया जाएगा। लेकिन उच्च न्यायालय बिलासपुर द्वारा अपिल दायर करने की तारीख से 45 दिनों की अवधि पूरी होने के पश्चात लगभग 6 माह अधिक समय व्यतीत होने के बावजूद भी यह प्रकरण अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) जांजगीर सुब्रत प्रधान ने लंबित कर पेशी की तारीख पर तारीख बढ़ाई जा रही है। अनुविभागीय अधिकारी राजस्व (जांजगीर ) ने इस चर्चित प्रकरण की प्रक्रिया दिनांक 28.07.2025 से प्रारंभ की है और अब तक इसकी 10 पेशी हुई । जिसमें लगातार पांच पेशियां अंतिम सुनवाई बाबत रखी गई और ये पेशियां सिर्फ अंतिम निर्णय की सुनवाई बाबत बढ़ाई गई । इसी तरह अंतिम सुनवाई की पिछली निर्धारित पेशी 11फरवरी2026
में कुल जारी आर्डर सीट 11 एवं प्रकरण जांच हेतु नहीं भेजा गया है, का उल्लेख कर अंतिम आदेश हेतु सुनवाई की अगली तारीख 10 मार्च 2026 निर्धारित की गई है।
अब नगर व क्षेत्र के प्रबुद्ध जन व आम जन अन्नू उर्फ आनंद केडिया के चर्चित व लंबित प्रकरण पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) जांजगीर के सुब्रत प्रधान के न्यायालय में क्या निर्णय होती है पूर्व की भांति पक्षकार को राहत दिलाते हुए अंतिम आदेश हेतु एक बार पुनः सुनवाई की तिथि बढ़ाकर इस गंभीर प्रकरण को लंबित रखना चाहेंगे? यह आगामी 10 मार्च 2026 को ही तय होगा। फिलहाल प्रकरण चलने के बावजूद भी न्यायालय, शासन- प्रशासन और स्थानीय निकाय के वगैर रोक-टोक के याचिकाकर्ता व पक्षकार अन्नू केडिया द्वारा शासकीय जमीन पर अतिक्रमण कर आलीशान दुकान व मकान कहावत निर्माण कार्य बदस्तूर जारी है।