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अफवाहों के बीच आर्थिक सुरक्षा का कवच
राज्य के किसानों की होली इस साल रंगों से भरी होगी। दरअसल छत्तीसगढ़ की सुशासन वाली विष्णु सरकार होली त्योहार के पहले धान का बोनस देने जा रही है। इसके लिए कैबिनेट में मुहर भी लगा दी गई है। राज्य के 25 लाख किसानों को 10 हजार करोड़ रुपये बांटे जाएंगे। धान खरीदी की अंतर की राशि का भुगतान प्रति वर्ष राज्य सरकार करती है। अभी तक यह राशि दो किश्तों में दी जाती रही है, लेकिन इस साल होली पर्व के पहले एकमुश्त अंतर की राशि का भुगतान किया जाएगा। राज्य सरकार के इस निर्णय से किसानों को एक साथ बड़ी रकम मिलेगी, जिसका असर बाजार में भी दिखाई देगा। दरअसल विपरीत परिस्थितियों में भी राज्य सरकार का धान खरीदी का मॉडल पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर जहां विदेशी समझौता और नीतियों के चलते किसानों के बीच तरह-तरह अफवाहें दौड़ते नजर आ रही है, वहीं दूसरी ओर राज्य की सुशासन वाली विष्णु सरकार किसानों की आय बढ़ाने के साथ ही उन्हें आर्थिक सुरक्षा का कवच प्रदान करने का भी काम कर रही है। सरकार का यह निर्णय आर्थिक सुरक्षा के साथ-साथ राजनीतिक सुरक्षा के क्षेत्र में भी महती भूमिका निभाते दिख रही है। राज्य सरकार रिकार्ड 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी कर राज्य की बड़ी आबादी के बीच पैठ बनाने में सफल होते दिख रही है।
भवन अधूरा, हंगामा पूरा
विधानसभा का शीतकालीन सत्र 23 फरवरी से शुरु होने जा रहा है, यह सत्र 20 मार्च तक चलेगा। अधूरे भवन में इस बार हंगामा पूरा होने के आसार हैं। पीडब्ल्यूडी विभाग को विधानसभा की गरिमा के अनुरुप निर्माण और व्यवस्थाओं की लंबी सूची सौंपी गई है। लेकिन उस पर अभी तक कितना अमल हो पाया यह स्पष्ट नहीं हो सका है। खैर निर्माण अधूरा ही सही लेकिन नए भवन में हंगामा पूरा होने के आसार हैं। विपक्ष के साथ ही सत्तापक्ष के सदस्य भी बजट सत्र का बेसब्री से इंजतार कर रहे हैं। हालांकि सत्र लंबा है, लेकिन इस दरम्यान अवकाश की संख्या भी काफी है, तकरीबन 10 दिन सत्र नहीं चल सकेगा। खैर सरकार इस बार बजट में क्या खास करने जा रही है, इसको लेकर राज्य की जनता खासी उत्साहित है, तो वहीं विपक्ष सरकार की खामियों को गिनाने को बेताब है। धान खरीदी और मनरेगा जैसे विषय इस बार प्रमुख मुददे हो सकते हैं। दूसरी ओर जमानत पर रिहा हुए कांग्रेस सदस्य कवासी लखमा ने भी सत्र में शामिल होने का आग्रह विधानसभा अध्यक्ष से किया है, जिस पर अभी तक अध्यक्ष ने कोई फैसला नहीं लिया है।
तो क्या मिटा दिए गए सबूत
राज्य का आबकारी विभाग और यहां हुआ घोटाला पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस घोटाले में मंत्री अफसर और कारोबारी समेत कई लोग सलाखों के पीछे जा चुके हैं। मामले की पड़ताल लगातार जारी है। इसी बीच लभांडी स्थित आबकारी भवन में आग लगने की वजह से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जलकर खाक हो गए। फिलहाल आग खुद से लगी या फिर किसी के द्वारा लगवाई गई यह जांच का विषय है। लेकिन आबकारी विभाग के कारनामे एक बार फिर चर्चा के केन्द्र बने हुए हैं। कहा तो यह भी जा रहा है कि जहां आग लगी है उन्हीं दस्तावेजो की जल्द ही आडिट होने वाली थी। तो क्या दस्तावेजों को जलाने यह आगजनी की गई है? ऐसे अनेकों सवाल इन दिनों आम जनता के जेहन में घूम रहे हैं। दरअसल आबकारी घोटाले मामले में सरकार और जांच एजेंसियों के अफसरों के प्रति ढीले रवैये के कारण पहले ही आरोप-प्रत्यारोप लगते रहे हैं। अब इसी विभाग में आगजनी से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज के खाक होने से आशंका और बढ़ गई है।
ड्रग्स का काला कारोबार
राज्य में ड्रग्स के काले कारोबार का मालमा अक्सर पढऩे, सुनने और देखने को मिलता है। लेकिन पुलिस के हाथ बड़े माफियाओं तक नहीं पहुंच पाते? बीते कुछ माह में ड्रग्स को लेकर चारों ओर कोहराम मचा हुआ था, लेकिन मौका देखते ही मामले को रफा-दफा कर दिया गया। राज्य में आखिर ड्रग्स का बड़ा कारोबारी कौन है? इसको लेकर इनों चर्चा तेज है। दरअसल ड्रग्स के कारोबार का जिंद एक बार फिर बाहर निकलकर सामने आया है। इस बार सप्लायर के रुप में एक पुलिस जवान की गिरफ्तारी हुई है। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या पुलिस ड्रग्स के असली कारोबारी तक पहुंच पायेगी? या फिर हर बार की तरह इस बार भी मामला ठंडा होते ही रफा-दफा कर दिया जाएगा।
निशाने पर भतपहरी
राज्य का पीडब्ल्यूडी विभाग इन दिनों निर्माण काम से ज्यादा भ्रष्टाचार के लिए जाना जा रहा है। वैसे तो इस विभाग का काम सड़क निर्माण, बिल्डिंग आदि होता है, लेकिन इन मूल काम से दूर इस विभाग का नाता भ्रष्टाचार से जुड़ गया है। इस समय आरोपों के घेरे में है मुख्य अभियंता विजय कुमार भतपहरी और आरोप लगाने वाले है भाजपा के कददावर आदिवासी नेता ननकीराम कंवर। ननकरीराम कंवर ने भतपहरी के उपर कई गंभीर आरोप लगाते हुए मामले की जांच सीबीआई से करने को कहा है। इसके लिए पूर्व मंत्री भाजपा नेता कंवर ने प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी, राज्य के मुख्य सचिव विकासशील और विभागीय सचिव कमलप्रीत सिंह को पत्र लिखा है। दरअसल अभी तक ननकीराम कंवर का भ्रष्टाचार पर प्रहार असरकारक रहा है, सीजीपीएसी में हुआ भ्रष्टाचार इसका ज्वलंत उदाहरण है। इसके साथ ही कुछ दिन पहले तत्कालीन कोरबा कलेक्टर अजीत वसंत के खिलाफ ननकीराम कंवर ने मोर्चा खोल रखा था, फाइनली सरकार को कोरबा कलेक्टर को हटाना पड़ा। अब पीडब्ल्यूडी विभाग भ्रष्टाचार की जद में है। कहा जा रहा है कि इस विभाग में करोड़ों रुपये का अनुचित भुगतान कर सरकारी दस्तावेज गायब कर दिया गया है। दरअसल भतपहरी के खिलाफ वर्ष 2011 और 2015 में ईओडब्ल्यू और एसीबी में मामला दर्ज किया गया था, लेकिन अभी तक निष्पक्ष जांच नहीं हो पाई है। इसको लेकर अब ननकीराम कंवर ने मोर्चा खोल दिया है। फिलहाल मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाएगी यह निकट भविष्य में स्पष्ट हो जाएगा।
बाघ और वन भैंसा
प्रदेश के मंत्री इन दिनों सरकार के दो साल के कार्यकाल पूरा होने पर अपने विभागों का लेखा-जोखा जनता के समक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं। मंत्री केदार कश्यप राज्य के वन और वन्य जीवों को लेकर उपलब्धियां गिनाई। सरकार को वन्य जीवों को लेकर बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। 2022 तक राज्य में बाघों की संख्या सिमट कर मात्र 17 बची थी जो अब 35 हो गई है, कुल मिलाकर संख्या में दो गुना वृद्वि हुई है। वहीं सरकार विलुप्त हो रहे राजकीय पशु वन भैंसा को लेकर भी कारगर योजना पर अमल कर रही है। संभव है कि मध्यप्रदेश सरकार की तरह राज्य में भी समय से वन भैंसा लाने पर मुहर लगा दी जाए। इसके साथ ही बारनवापारा से उंदती में भी कुछ वन भैंसों को शिप्ट किया जा सकता है, इसके लिए सरकार ने सहमति भी जता दी है। कुल मिलाकर हरा-भरा छत्तीसगढ़ राज्य अब जंगली जानवरों पर भी उपलब्धि हासिल करते दिख रहा है।
बाजार गुलजार, सरकार के खजाना में इजाफा
कहते हैं किसी सरकार की नीतियां ही राज्य के विकास और आर्थिक सक्षमता का कारक बनती हैं। दरअसल हम बात कर रहे हैं बाजार और खरीददार की, जो सोना की बढ़ती कीमतों के मुंह फेरते दिख रहा है। राज्य सरकार ने इसी बीच आटो एक्सपो राडा का 15 दिवसीय आयोजन किया। इस आयोजन के दौरान रिकार्ड 44,826 वाहनों की बिक्री हुई। इस बिक्री से तकरीबन 458 करोड़ रुपये से भी अधिक का जीएसटी संग्रह किया गया। एक ओर जहां सोने की बढ़ती और घटती कीमतों ने खरीददारों से दूरी बनाने का काम किया, वहीं दूसरी ओर इस दरम्यान आटो बाजार गुलजार नजर आया। सरकार की लुभावनी नीतियों की वजह से राडा के दौरान पिछले साल की अपेक्षा तकरीबन 53 प्रतिशत वाहनों की बिक्री में वृद्धि दर्ज की गई। परिवहन विभाग ने आरटीओ चार्ज में सीधा 50 फीसदी कम करने का निर्णय लिया, जिससे बाजार में वाहन खरीदी में रकार्ड वृद्धि हुई। वाहनों की बिक्री के साथ ही तकरीबन 112 करोड़ रुपये का रोड टैक्स भी अर्जित किया गया। वहीं सड़क दुर्घटनाओं पर रोकथाम के लिए अंाशिक रुप से रोड सेफ्टी कर की भी वसूली की गई। कुल मिलाकार वित्तीय वर्ष के आखिरी में भी सरकार के खजाने में इजाफा होते नजर आया।
400 एकड़ जमीन बर्बाद
राज्य में माईनिंग वेस्ट का मुद्दा समय-समय पर सामने आते रहता है। इस बार हाईकोर्ट ने माइनिंग वेस्ट को लेकर कड़ा रुख अपनाया है, विभागीय सचिव से एफीडेविड के साथ जवाब मांगा है। दरअसल राजधानी से लगे आरंग क्षेत्र में अवैध उत्खनन की वजह से तकरीबन 400 एकड़ भूमि बंजर हो गई है या यूं कहें की बर्बाद हो गई है। जिसको लेकर एक जनहित याचिका दायर की गई है। हाईकोर्ट ने अवैध खनन को लेकर नाराजगी जताई है और एफीडेविड के साथ जवाब मांगा है, जिसकी सुनवाई 26 फरवरी तय की गई है। हालांकि इस तरह के प्रकरण राज्य के विभिन्न हिस्सों में देखे जा सकते हैं, जहां अवैध उत्खनन के चलते कई एकड़ जमीने बर्बाद हो रही है। कोर्ट के साथ ही सरकार को भी इस ओर सख्त कदम उठाने की जरुरत है।
लगाम जरुरी
राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होने के बाद अपराधों पर नियंत्रण पाने की कवायद लगातार जारी है। दरअसल कहा तो यह भी जाता रहा है कि वीआईपी रोड़ समेत अन्य स्थानों के क्लब, बार, ढाबा, होटल और रेस्टोरेंट अब तक पुलिस के संरक्षण में देर रात तक संचालित होते रहे हैं, खैर सच क्या है? यह तो जांच का विषय है। लेकिन इन तमाम आरोपों के बीच कमिश्नर प्रणाली लागू होने के बाद इन सभी समस्याओं पर नियंत्रण पाने की कवायद चल रही है। राजधानी पुलिस ने रायपुर के सभी होटल, ढाबा, बार, क्लब और रेस्टोरेंट कारोबारियों की बैठक लेकर सख्त हिदायत दी है कि किसी भी हाल में 12 बजे रात तक इन्हें बंद कर दिया जाना चाहिए। 12 बजे रात के बाद कोई भी इन तमाम जगहो में दिखना नहीं चाहिए और न ही 12 के बाद कोई बिलिंग की जाएगी। यदि ऐसा करते कोई कारोबारी पाया गया तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। लायसेंस भी रद्द करने की सिफारिश की जा सकती है। इसकी निगरानी के लिए इन तमाम अड्डों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की बात भी कही गई है। निश्चित ही पुलिस की यह पहल सराहनीय है, यदि वास्तव में राजधानी को अपराध से मुक्ति दिलाना है या नियंत्रण पाना है तो इन गतिविधियों पर लगाम लगाना जरुरी है।
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