16वें वित्तायोग में हिमाचल का डेवोल्यूशन 2388 करोड़ बढ़ा

शिमला। पूर्व केंद्रीय मंत्री और हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा है कि हिमाचल सरकार और उनके मंत्री रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट यानी आरडीजी खत्म होने पर झूठा प्रचार कर रहे हैं। अनुराग ठाकुर ने 16वें वित्त आयोग के आंकड़ों के आधारित एक पे्रजेंटेशन के जरिए स्थिति साफ की है। अनुराग ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदा हिमाचल के हितों का विशेष ध्यान रखा है, और कभी किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं आने दी। यह देखना दुर्भाग्यपूर्ण है कि रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (आरडीजी) पर कांग्रेस सरकार प्रदेश को गुमराह कर रही है। उन्होंने कहा कि रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट कोई स्थायी नहीं, बल्कि अस्थायी व्यवस्था थी और 16वें वित्त आयोग ने सामान्य आरडीजी की सिफारिश नहीं की, क्योंकि कई प्राप्तकर्ता राज्यों, जिसमें हिमाचल भी शामिल है, ने लगातार कमजोर कर प्रयास और उच्च प्रतिबद्ध व्यय का पैटर्न देखा गया।

हिमाचल का डेवोल्यूशन घटा नहीं, बल्कि बढ़ा है। अन्यायपूर्ण कटौती के कांग्रेस के खोखले दावों के विपरीत, 16वें वित्त आयोग ने हिमाचल प्रदेश का विभाज्य पूल में हिस्सा 15वें वित्त आयोग के 0.830 फीसदी से बढ़ाकर 0.914 फीसदी कर दिया है। नए फॉर्मूले में हिमाचल का पोस्ट-डेवोल्यूशन प्राप्ति 2025-26 के बजट अनुमान में लगभग 11,561.66 करोड़ से बढक़र 13,949.97 करोड़ हो गया है, जो लगभग 2,388 करोड़ की वृद्धि है। यह केंद्रीय कर डेवोल्यूशन में एक महत्त्वपूर्ण वृद्धि है। 15वें वित्त आयोग के तहत कोविड से उबरने में राज्यों की मदद के लिए आरडीजी फ्रंट-लोडेड था और इसे स्पष्ट रूप से समयबद्ध, संक्रमणकालीन उपाय के रूप में तैयार किया गया था, जिसका उद्देश्य राज्यों को 2025-26 तक लगभग शून्य राजस्व घाटे तक लाना था।

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