कोतवाली प्रकरण में विवेचक की लापरवाही उजागर, एसआई निलंबित
समय रहते गिरफ्तारी होती तो टल सकती थी दुर्भाग्यजनक स्थिति
बिलासपुर । विवेचना में लापरवाही बरतने के आरोप में एसएसपी रजनेश सिंह ने सिटी कोतवाली थाना के एसआई गणेश राम महिलांगे को निलंबित कर दिया है।
बिलासपुर कोतवाली थाना क्षेत्र से जुड़े एक गंभीर प्रकरण में पुलिस विवेचना के दौरान हुई लापरवाही अब स्पष्ट रूप से सामने आ गई है। यद्यपि आरोपी सोहेल ख़ान की गिरफ्तारी पुलिस द्वारा कल देर शाम कर ली गई, किंतु यह तथ्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि यदि आरोपी को समय रहते गिरफ्तार किया गया होता तो न केवल घटना की गंभीरता को कम किया जा सकता था, बल्कि उससे जुड़ी दुर्भाग्यजनक स्थिति को भी रोका जा सकता था।

प्रकरण की जाँच में यह सामने आया है कि विवेचक उप निरीक्षक गणेश राम महिलांगे द्वारा समय पर आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार प्रार्थी द्वारा घटनाक्रम की जानकारी दिए जाने के बावजूद विस्तृत बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तत्काल प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। इसी देरी का लाभ आरोपी को मिला, जिससे प्रकरण और अधिक संवेदनशील हो गया।

दूसरी ओर शुक्रवार को सिटी कोतवाली के सामने हिंदूवादी संगठन के धरना प्रदर्शन के बाद पुलिस की छवि दागदार हुई है। सवाल यह भी उठ रहा है कि विवेचना अधिकारी महिलांगे ने क्यों लापरवाही बरती। उनकी लापरवाही का दुष्परिणाम ये निकला कि पुलिस के कामकाज पर लोगों ने सवाल उठाए और एक जान चली गई।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विवेचक उप निरीक्षक गणेश राम महिलांगे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। एसएसपी ने स्पष्ट किया कि पुलिस कार्यप्रणाली में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी, विशेषकर ऐसे मामलों में जहाँ त्वरित कार्रवाई से स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है।
पुलिस विभाग का मानना है कि विवेचना में की गई छोटी सी चूक भी बड़े परिणाम ला सकती है। इसी को दृष्टिगत रखते हुए यह कार्रवाई अन्य अधिकारियों के लिए भी एक स्पष्ट संदेश है कि कर्तव्य निर्वहन में शिथिलता न केवल विभागीय कार्रवाई को जन्म देती है, बल्कि आमजन के विश्वास को भी आघात पहुँचाती है।
फिलहाल आरोपी को न्यायिक प्रक्रिया के तहत रिमांड पर लिए जाने की कार्रवाई की जा रही है, वहीं प्रकरण की उच्चस्तरीय समीक्षा भी प्रारंभ कर दी गई है ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही की पुनरावृत्ति न हो।
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