शीत लहर से निपटने के लिए जनहित में दिशा-निर्देश जारी

दंतेवाड़ा। कार्यालय मुख्य चिकित्सा से जारी विज्ञप्ति अनुसार भारत सरकार द्वारा सर्दियों के मौसम में कई प्रदेशों में शीतलहर एवं भारी ठंड होने की सूचना दी गई है जिसमें जन धन की हानि होने की संभावना है इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा दिशा निर्देश जारी किए गए है। इसके अनुसार जन सामान्य को स्थानीय मौसम पूर्वानुमान के लिए रेडियो, टीवी एवं समाचार पत्र जैसे सभी मीडिया द्वारा दी जा रही जानकारी का अनुसरण करने, पर्याप्त मात्रा में गर्म कपड़े, आपातकालीन समय के लिए आवश्यक खाद्य पदार्थ, पानी, ईंधन, बैटरी चार्जर इमरजेंसी लाईट एवं आवश्यक दवाईयां तैयार रखने।

विभिन्न प्रकार की बीमारियों जैसे- फ्लू, सर्दी, खांसी एवं जुकाम आदि के लक्षण हो जाने पर स्थानीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं या चिकित्सक से संपर्क किये जाने, नियमित रूप से गर्म पानी पीते रहने, अल्प तापवस्था के लक्षण जैसे सामान्य से कम शरीर का तापमान, न रुकने वाली कपकपी, याददाश्त चले जाना, बेहोशी या लड़खड़ाना आदि प्रकट होने पर उचित इलाज के लिए निकटतम स्वास्थ्य केन्द्रों से सम्पर्क स्थापित करने को कहा गया है।

इसके अलावा अत्यधिक ठंड के समय दीर्घकालीन बीमारियों जैसे डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, श्वास संबंधी बीमारियों वाले मरीज, वृद्ध पुरुष, महिलायें जिनकी आयु 64 वर्ष से अधिक, 08 वर्ष से कम आयु के बच्चे, गर्भवती महिलाएं आदि को ऐसी स्थिति में देखभाल करें। अधिक ठंड पड़ने पर पर्याप्त वेंटिलेशन होने पर ही रूम हीटर का उपयोग सावधानी एवं सतर्कता के साथ करें एवं बंद कमरे गर्म करने के लिए कोयले का उपयोग ना करें क्योंकि यह कोयला जलने पर कार्बन मोनोऑक्साइड उत्पन्न होती है जो हमारे स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है जिससे किसी की भी मृत्यु हो सकती है। अधिक ठंड पड़ने पर जहां तक संभव हो सके, पालतू जानवरों को घर के अंदर ही रखें।

शीत लहर में अधिक ठंड के लम्बे समय तक संपर्क में रहने से त्वचा कठोर एवं सुन्न होने, शरीर के अंगों जैसे हाथ पैर की उंगलियों, नाक एवं कान में लाल फफौले, जैसे लक्षण दिख सकते हैं। शरीर के भाग के मृत हो जाने पर त्वचा का लाल रंग बदलकर काला हो सकता है। यह बहुत खतरनाक है। यह बहुत खतरनाक है और गैंग्रीन रोग कहा जाता है। इसके लिए तत्काल चिकित्सक से परामर्श लें। शीत लहर के संपर्क में आने से फ्रॉस्टबाइट एवं हाइपोथर्मिया बीमारी हो सकती है। शीतलहर के संपर्क में आने से फ्रॉस्टबाइट होने पर शरीर के अंगों जैसे हाथ-पैर की उंगलियां सुन्न हो जाना, नाक एवं कान की त्वचा का रंग सफेद एवं पीला हो जाना आदि लक्षण पाये जाने पर तत्काल चिकित्सक से परामर्श लें।

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