thethinkmedia@raipur
गांव-गली, मकान-दुकान सिर्फ एक ही चर्चा
एक ओर विष्णु सरकार ने अपने 20 माह के कार्यकाल में अनेकों उपलब्धियां हासिल की हैं। वहीं अपने दो साल के कार्यकाल के नजदीक पहुंचते ही सरकार ने पहली बार बिजली बिल के रुप में यहां की जनता को बड़ा झटका दिया है, या यूं कहें कि बहुत ही साहसिक राजनीतिक निर्णय लिया है। आम तौर पर वोट बैंक की फिक्र में सरकारें और राजनीतिक पार्टियां अब ऐसे निर्णय नहीं लेतीं। खैर वित्तीय लिहाज से यह निर्णय उचित हो सकता है, लेकिन इस निर्णय से राजनीतिक लाभ की फिलहाल कोई गुंजाइश नहीं दिख रही है। इन दिनों गांव-गली, दुकान-मकान सिर्फ और सिर्फ बढ़़ी हुई बिजली दरों की चर्चा हो रही है। हालांकि गुटबाजी से जूझ रही प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस बढ़ी हुई बिजली दरों पर जनता की आवाज बुलंद करने में नाकामयाब दिख रही है। कांग्रेस के बड़े नेताओं ने जितना हल्ला 7258 रुपये के नगर निगम के टैक्स के लिए किया, उतना विरोध बढ़ी हुई विद्युत दर के लिए नहीं की। बहरहाल केंद्र और राज्य सरकार इन दिनों सोर्स ऑफ एनर्जी में बदलाव पर जोर दे रही हैं। सोलर एनर्जी के माध्यम से जनता अब सिर्फ ऊर्जा का उपभोग ही नहीं बल्कि ऊर्जादाता भी बन सकती है।
विवादित आईएफएस अफसर और पोस्टिंग
राज्य सरकार ने हाल ही में आईएफएस अफसरों की पोस्टिंग की है। जिसमें सीसीएफ स्तर के अफसरों के पदों में बदलाव किया गया है। इस लिस्ट में जिन अफसरों को तवज्जों दी गई है, उसमें से ज्यादातर अफसरों का विवाद से गहरा नाता रहा है। एक आईएफएस अफसर ने डीएफओ रहते हुए सरकारी निवास में आलीशान स्वीमिंग पुल बनाकर चर्चा में रहे। हालांकि स्वीमिंग पुल के अलावा भी साहब के और भी कारनामें हैं। वहीं दूसरे अफसर मालिक मकबूजा कांड के आरोपी हैं, जिनकी चार्जशीट आज भी मुख्यालय में धूल खा रही है। अब डीएफओ स्तर के अफसरों में भी जल्द फेरबदल होने जा रहे हैं, इसमें भी विवादित अफसरों ने पोस्टिंग पाने पूरी ताकत झोंक दी हैं। हालांकि विभाग की एक तेजतर्रार महिला अफसर ने कुछ अफसरों की कुंडली का जिक्र करते हुए फाइल को आगे बढ़ा दिया है। अब देखना यह है कि सीसीएफ की तरह ही डीएफओ में भी विवादित अफसरों की पोस्टिंग कर दी जाएगी या फिर साफ छवि के अफसरों को मौका दिया जाएगा।
राडार में मूणत?
बसंत अग्रवाल समय-समय पर अपने कारनामों के लिए चर्चा में रहते हैं। वैसे तो भाजपा की पृष्ठभूमि से आने वाले बसंत अग्रवाल का नाम सबसे पहले जमीन के कारोबार में जुड़ा। उसके बाद उन्होंने साजा से राजनीतिक जमीन मजबूत करने का फैसला किया। लेकिन साजा में लाभचंद बाफना के सामने बसंत टिक नहीं पाये। लाभचंद बाफना और बसंत के राजनीतिक विवाद का वीडियो आज भी मौजूद है। जहां बसंत ने भरे मंच में लाभचंद बाफना की राजनीति निलाम कर दी थी। खैर अब साजा में मसला ओबीसी वर्सेस ओबीसी की ओर बढ़ चुका है। शायद बसंत अग्रवाल भी इस बात को भली-भांति जानते हैं कि अब साजा में राजनीतिक जमीन तैयार करना बेहद कठिन है। संभवत: इसीलिए बसंत अग्रवाल ने धर्म को ढ़ाल बनाकर अपने राजनीतिक लक्ष्य को हासिल करने रायपुर पश्चिम की ओर बढ़ चुके हैं। बसंत इन दिनों रायपुर में सक्रिय हैं, और जिस क्षेत्र में वह सक्रिय है वो क्षेत्र पूर्व मंत्री राजेश मूणत का है। बसंत यह भली-भांति जानते हैं कि मूणत का कद पार्टी में इन दिनों कम कर दिया गया है। लाख कोशिशों के बाद भी उन्हें मत्रिमंडल में जगह नहीं मिली और शायद अगले विधानसभा चुनाव में टिकट का संकट भी खड़ा हो जाए। इसलिए बसंत के निशाने पर अब रायपुर पश्चिम है। बसंत एक बार फिर अपने कारनामें के लिए सुर्खियों में है। दरअसल एक वीडियों में बसंत अग्रवाल यह कहते नजर आ रहे हैं कि विधायक और मंत्री उनके सामने कुछ नहीं लगते। अब यह विधायक मूणत हैं? या फिर और कोई? फिलहाल इस पर कुछ कहना जल्दबाजी होगी।
दास और मालिक
राज्य की जांच एजेन्सी ने शराब घोटाले मामले में रिटायर्ड आईएएस निरंजन दास को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। हालांकि लोगों का कहना है कि दास तो सिर्फ दास ही थे, वह तो मालिक के फरमान का पालन करते थे। खैर अपराध तो अपराध होता है, अब इसे मालिक करे या दास। दरअसल निरंजन दास और उनके तत्कालीन सहायक के बिना जानकारी के यह कारनामा संभव ही नहीं था। शराब घोटाले के दौरान निरंजन दास आबकारी आयुक्त रहे, रिटायर होने के बाद भी दास कुर्सी में विराजमान रहे। भला बिना मालिक की कृपा से इतनी मूल्यवान कुर्सी कैसे संभव है? खैर पूरे कारनामे में ईडी की एंट्री हो चुकी थी जिसमें निरंजन दास उस दौरान रिटायर होने की वजह से बच निकले थे। लेकिन एक ही मामले में मल्टी एजेंसियां इन दिनों छत्तीसगढ़ में जांच कर रही हैं, जिससे दास का बच पाना थोड़ा कठिन था। आखिरकर शराब घोटाले में शामिल दास और मालिक एक ठिकाने में पहुंच गए।
सीजीएमएससी घोटाले पर खामोशी?
बीते दिनों छत्तीसगढ़ में केन्द्रीय तथा राज्य की जांच एजेंसियों ने भ्रष्टाचार के आरोप में कई बड़े अफसरों की गिरफ्तारियां की है। अलग-अगल मामलों में अलग-अलग जांच एजेंसियों ने रिटायर्ड आईएएस आलोक शुक्ला, निरंजन दास, जीवन किशोर धु्रव और उनके बेटे सुमित धु्रव, आरती वासनिक एवं रिटायर्ड आईएएस टामन सिंह सोनवानी की बहू दीपा आडिल, निशा कोशले को गिरफ्तार किया है। इस सप्ताह जांच एजेंसियों ने स्पष्ट संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार में लिप्त अफसरों कारोबारियों या नेताओं को बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि इस कार्यवाही के बाद सीजीएमएससी में हुए 500 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले की भी चर्चा आम है। कहा जाता है कि एक नेता ने केन्द्र सरकार और जांच एजेंसियों को पत्र लिखकर सीजीएमएससी में हुए 500 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले में शामिल अफसरों की गिरफ्तारी की मांग की है। दरअसल इसके पीछे का कारण यह बताया जा रहा है कि सीजीएमएससी घोटाले में नाम आने के बाद भी कुछ अफसर अभी भी जिम्मेदार पद पर बैठे हुए हैं। ऐसे में सीजीएमएमसी मामले में खामोशी को लेकर सवाल उठना लाजमी है।
विजय शर्मा का कद बढ़ा
राज्य मंत्रिमण्डल के सदस्यों के प्रभार में हाल ही में बदलाव किया गया है। इस बदलाव में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा को बस्तर का प्रभारी मंत्री बनाया गया है। वैसे तो इसे नक्सल मामले में सरकार के द्वारा किए जा रहे काम से जोड़ा जा रहा है। दरअसल उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के पास वर्तमान में गृह मंत्रालय के साथ-साथ पंचायत एवं ग्रामीण विकास जैसे महत्वपूर्ण विभाग भी हैं। इन दोनों विभागों का बस्तर के बदलाव में अहम रोल है। अब विजय शर्मा को बस्तर का प्रभारी मंत्री भी बना दिया गया है। संभव है इस फैसले से बस्तर के विकास में और गति आये। लेकिन इसका दूसरा राजनीतिक अर्थ यह भी निकाला जा रहा है कि विजय शर्मा की राजनीतिक पकड़ और मजबूत हुई है, जिसके कारण उन्हें बस्तर के प्रभारी मंत्री का भी दायित्व सौंपा गया है।
editor.pioneerraipur@gmail.com