जैन समाज में पर्युषण पर्व का छठवा दिन उत्तम संयम धर्म कहलाता है। यह दिन धूप दशमी के नाम से भी जाना जाता है, इंद्रियों पर नियंत्रण इच्छाओं पर संयम धारण ही संयम धर्म कहलाता है संयम से ही आत्मा की शांति और उन्नति होती है। आज श्रीजी के अभिषेक के लिए प्रथम चार कलश का सौभाग्य , सुधीर कपूर चंद जैन, ऋषभ पार्वती देवी जैन, अनुराग पंडित डी पी जैन, विदित दिलीप जैन को प्राप्त हुआ
आज की पवित्र धूप दशमी के दिन शांति धारा करने का सौभाग्य मंदिर निर्माण अध्यक्ष दिलीप जैन को प्राप्त हुआ दिलीप जैन ने शांति धारा के पश्चात बताया मन का दास न बनना मन को दास बनाना ही संयम धर्म है। आज की महा आरती करने का सौभाग्य अनिल जी आशुतोष जी लोहाडिया परिवार को पर्याप्त हुआ। आज फिर से शांति धारा मंत्र बोलने पदमचंद जैन को आमंत्रित किया गया मंदिर में कार्यरत ऋषभभैया जी मधुर आवाज से भजन गाकर भक्ति मय माहौल बनाए रखा। जैन समाज द्वारा धूप दशमी का पर्व भक्ति भाव से मनाया गया सुबह से ही मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ी और पूजा अर्चना की गई समाज के लोगों ने शाम 4:00 बजे धूप दीप और सुगंधित सामग्री अर्पित कर धर्म आराधना की पर्यूषण पर्व जैसे-जैसे समाप्ति की ओर बढ़ रहा है मंदिर में जैन समाज के लोगों की भीड़ और उत्साह से भरपूर माहौल दिखाई दे रहा है। धूप दशमी के दिन जैन समाज के अध्यक्ष दिनेश जैन और सचिव अमित जैन ने बताया कि आज के दिन जिनेंद्र देव के सामने धूप खेते है और अंतर कर्म की पवित्रता और बुरे कर्मों के क्षय की भावना भाते हैं। यह दिन समाज के लिए बहुत ही पवित्र दिन है। मंदिर जी में धूप खेने के लिए बड़ी संख्या में महिलाओं पुरुषों और बच्चों की उपस्थिति दिखाई दे रही थी.
