गणेश जी की चने के दाने बराबर सूक्ष्म मूर्ति

भिलाई। भगवान् श्री गणेश द्वारा महाभारत की गाथा लिखते हुए संगमरमर पत्थर की अद्भुत सूक्ष्मतम् प्रतिमा। इस प्रतिमा का निर्माण सूक्ष्मकला के जादूगर डा. अंकुश देवांगन ने किया है। चने के दाने के बराबर इस कृति को कलाकार ने अपने ऊंगली के नाखून पर स्थापित किया है।

अंकुश बड़ी बड़ी प्रतिमाओं के विसर्जन दौरान होने वाले जल प्रदूषण से लोगों को जागरूक करने के लिए सूक्ष्म मूर्तियां बनाते हैं। ताकि आने वाली पीढ़ी को हम एक स्वस्थ धरती दे सकें। उनके कला की विशेषता है कि सूक्ष्मता के बावजूद भी उसमें समस्त अवयव विद्यमान रहते हैं। प्रस्तुत मूर्ति में भगवान् श्री गणेश के आंख, सूंड, हाथों में कलम और मोदक तथा गोदी में महाभारत पुस्तक बहुत ही अच्छे से परिलक्षित हो रहे हैं।

ललित कला अकादमी, संस्कृति मंत्रालय, नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ से प्रथम बोर्ड मेम्बर बने डा. अंकुश देवांगन ने न सिर्फ सूक्ष्म प्रतिमाएं बनाई है बल्कि बड़ी से बड़ी प्रतिमा बनाने में भी वे महारत रखते हैं। सिविक सेंटर में कृष्ण-अर्जुन रथ, रूआबांधा का पंथी चौक, भिलाई निवास का नटराज, सेक्टर 1 का श्रमवीर चौक, बोरिया गेट का प्रधानमंत्री ट्राफी चौक, सुनीति उद्यान का एथिक्स पार्क, दल्ली राजहरा में विश्व का सबसे बड़ा लौहरथ, रायपुर में पुरखौती मुक्तागन, सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय क्राफ्ट मेला हरियाणा में सैकड़ो प्रतिमाएं, दुर्गापुर स्टील प्लांट पश्चिम बंगाल में भव्य से भव्यतम प्रतिमाएं उनके कला की ऊंचाईयों को दर्शाती है। सूक्ष्म प्रतिमाओं के निर्माण के लिए उन्हें लिम्का बुक ऑफ द रिकार्ड का अवार्ड मिल चुका है।

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