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तो क्या दीपक बैज और डॉ. महंत पद के काबिल नहीं?

रायपुर। पूर्व सीएम भूपेश बघेल के जन्म दिन के मौके पर कांग्रेस के सीनियर नेता रविन्द्र चौबे ने पार्टी संगठन को किनारे कर खुले तौर पर बयान दिया है कि भूपेश बघेल को प्रदेश कांग्रेस का फि र नेतृत्व संभालना चाहिए। रविन्द्र चौबेे कांग्रेस के कोई छोटे-मोटे कार्यकर्ता तो हैं नहीं, जाहिर सी बात है यह बयान उन्होंने बहुत सोच-समझकर दिया होगा, या उनसे दिलवाया गया होगा। खैर चौबे के इस बयान के राजनीतिक मायने क्या हैं? क्या वर्तमान प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व दीपक बैज और नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत पद के काबिल नहीं हैं? आखिर रविन्द्र चौबेे ने खुले मंच से इतनी बड़ी बात क्यों कही? खैर कारण जो भी हो लेकिन रविन्द्र चौबेे सदैव से ही सत्ता प्रेमी रहे हैं। उनका संगठन और पार्टी से कभी कोई सरोकार नहीं रहा। सम्भवत: फि र किसी राजनीतिक स्वार्थ के चलते रविन्द्र चौबे ने यह बयान दिया होगा। भूपेश बघेल को प्रदेश की कमान सौपने की बात उन्होनें क्यों कही ? इसको लेकर पार्टी के अन्दर विवाद खड़ा हो गया है। क्या रविन्द्र चौबेे को अभी से नेतृत्व और चुनाव की चिंता सताने लगी है? क्या आने वाले समय में उनकी राजनीति को खतरा है? खैर यह कांग्रेस का अंद्रोणी मामला है। दरअसल रविन्द्र चौबेे के राजनीतिक इतिहास को देखेंगे तो वह हमेशा सत्ता प्रमुख के इर्द-गिर्द ही नजर आते रहे हैं।
रविन्द्र चौबेे अविभाजित मध्यप्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के बेहद करीबी थे। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद वह तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व. अजीत जोगी की परिक्रमा करते नजर आते थे। यहीं नहीं आरोप तो यह भी है कि भाजपा और रमन सरकार में उन्हें 13वां मंत्री का अघोजित दर्जा भी प्राप्त था। राज्य में कांग्रेस की सत्ता नहीं रहने तक भूपेश बघेल और रविन्द्र चौबेे एक-दूसरे के धुर विरोधी हुआ करते थे। इतना ही नहीं अरोप तो यह भी है कि कभी साजा से पाटन हराने की सियासी गोलबंदी हुआ करती थी, तो कभीे पाटन से साजा हराने की चालें चली जाती थीं। लेकिन फि र वक्त बदला, सत्ता बदली जैसे ही भूपेश को मुख्यमंत्री घोषित किया गया चौबेे ने तुरंत अपनी चाल बदल दी, वह सत्ता प्रमुख भूपेश बघेल के सबसे करीबी बन गए या यूं कहें कि सत्ता के सबसे नजदीक हो गए। बहरहाल रविन्द्र चौबेे के इस राजनीतिक बयान के बाद प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने उन्हें महाज्ञानी करार देते हुए अविलंब अनुशासन समिति की बैठक आहूत की बात कही है।