दिमाग के स्वास्थ्य और न्यूरोलॉजिकल स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में योग की भूमिका समझना ज़रूरी

डॉ. अविनाश गुप्ता, कंसल्टेंट न्यूरोलॉजी, अपोलो हॉस्पिटल्स, बिलासपुर ने बताया तनाव, मानसिक परेशानी, ध्यान भटकाने वाली चीज़ें और जानकारी की भरमार आज के आधुनिक दौर में हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर असर कर रहे हैं। सोचने, समझने, याद रखने, ध्यान केंद्रित करने और समस्याओं को हल करने जैसी मानसिक प्रक्रियाओं से संबंधित क्षमताओं को सुरक्षित रखने और बढ़ाने की आवश्यकता बहुत ज़्यादा ज़रूरी हो गई है। हम अक्सर शारीरिक स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करते हैं, लेकिन हमारे दिमाग का स्वास्थ्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि यही हमारे विचारों, कार्यों और कुल स्वास्थ्य को नियंत्रित करता है। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं पूरी दुनिया भर में बढ़ रही हैं, दूसरी ओर योग की लोकप्रियता भी बढ़ रही है। प्राचीन फिर भी हर दौर में बहुत ही प्रासंगिक अभ्यास योग, दिमाग के और न्यूरोलॉजिकल स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का एक शक्तिशाली साधन है।

योग और दिमाग के स्वास्थ्य के बीच संबंध
हाल ही के अध्ययनों से पता चलता है कि योग का दिमाग के स्वास्थ्य पर सीधा प्रभाव पड़ता है, खास कर तनाव में कमी लाने, स्मृति बढ़ाने और सोचने, समझने, याद रखने, ध्यान केंद्रित करने और समस्याओं को हल करने जैसी मानसिक प्रक्रियाओं जैसे क्षेत्रों में। इंटरनेशनल जर्नल ऑफ योगा (2022) में प्रकाशित शोध से संकेत मिलता है कि जिन्होंने 12 सप्ताह तक नियमित रूप से योग का अभ्यास किया, उन्होंने स्मृति, ध्यान और कार्यकारी कार्य जैसी संज्ञानात्मक क्षमताओं में महत्वपूर्ण सुधार का अनुभव किया। हमारा ध्यान भटका सकें ऐसी कई बातें डिजिटल दुनिया में मौजूद हैं, उसके साथ-साथ मल्टीटास्किंग लगातार हमारी संज्ञानात्मक क्षमता को प्रभावित कर रहे हैं, इस पर एक बहुत ज़रूरी उपाय के रूप में योग काम कर सकता है।

माइंडफुलनेस यानी अपनी भावनाओं, विचारों और शारीरिक संवेदनाओं के प्रति सजग रहने पर आधारित, ध्यान और प्राणायाम (साँस लेने के व्यायाम) जैसे अभ्यास पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम को सक्रिय करते हैं, जिससे तनाव को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। कोर्टिसोल के स्तर को कम करके, योग न्यूरोप्रोटेक्टिव लाभ प्रदान करता है, जिससे चिंता, निराशा और अन्य मानसिक स्वास्थ्य विकारों का ख़तरा कम होता है। आज शहरी और ग्रामीण दोनों आबादी में मानसिक तनाव बढ़ रहे हैं, उनके लिए ये लाभ विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।

न्यूरोलॉजिकल विकारों के लिए एक थेराप्यूटिक उपकरण के रूप में योग काम कर सकता है
स्ट्रोक, पार्किंसंस और मल्टीपल स्केलेरोसिस जैसी न्यूरोलॉजिकल बिमारियों के मरीज़ों के लिए योग को एक पूरक थेरपी के रूप में काम कर सकता है। इन विकारों की वजह से अक्सर शरीर को हिलाने में कठिनाई और मोटर कुशलताओं की हानि और सोचने, समझने, याद रखने, ध्यान केंद्रित करने और समस्याओं को हल करने जैसी मानसिक प्रक्रियाओं में शिथिलता होती है। इन मरीज़ों में योग के समग्र दृष्टिकोण से शारीरिक गतिविधियों, संतुलन और मानसिक स्पष्टता में सुधार हुआ है।

द जर्नल ऑफ पार्किंसंस डिजीज (2020) में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि योग करने वालों ने योग न करने वालों की तुलना में बेहतर संतुलन, शारीरिक गतिविधियों में शिथिलता के कम लक्षण और जीवन की कुल बेहतर गुणवत्ता दिखाई दी। योग के न्यूरोप्लास्टिक प्रभाव, ब्रेन रिऑर्गनाइज़ेशन को उत्तेजित करने की इसकी क्षमता, न्यूरोडीजेनेरेटिव बिमारियों के मरीज़ों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है। यह रिऑर्गनाइज़ेशन ब्रेन को अनुकूलित करने, नए न्यूरल मार्ग बनाने और न्यूरोलॉजिकल नुकसान के प्रभाव को कम करने में सक्षम बनाता है।

योग के ज़रिए शरीर को हिलाने, नियंत्रित करने की क्षमता को बढ़ाया जा सकता है
विशेष रूप से वृद्ध वयस्कों में शरीर को हिलाने, नियंत्रित कर पाने की क्षमता में गिरावट, वैश्विक स्तर पर एक बढ़ती हुई चिंता है। लेकिन इसके लिए योग एक आशाजनक समाधान प्रदान करता है। न्यूरोजेनेसिस को उत्तेजित करके, नए न्यूरॉन्स के बनने से, योग दिमाग के कार्य को बढ़ाने, याददाश्त में सुधार करने और व्यक्तियों की उम्र बढ़ने के साथ संज्ञानात्मक क्षमताओं को बनाए रखने में मदद करता है।

अमेरिकन जर्नल ऑफ़ जेरिएट्रिक साइकियाट्री (2018) के एक अध्ययन में पाया गया कि नियमित रूप से योग का अभ्यास करने वाले वृद्ध वयस्कों ने दूसरे (जो योग नहीं करते) लोगों की तुलना में शब्दों और भाषा को याद रखने की बेहतर क्षमता (शाब्दिक स्मृति) और प्रोसेसिंग गति को दर्शाया। योग में अपनी भावनाओं, विचारों और शारीरिक संवेदनाओं के प्रति सजग रहने, ध्यान और गहरी साँस लेने पर ध्यान केंद्रित किया जाता है, जिससे सोचने, समझने, याद रखने, ध्यान केंद्रित करने और समस्याओं को हल करने जैसी मानसिक प्रक्रियाओं से संबंधित कार्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया जाता है। उम्र के बढ़ने के साथ-साथ सोचने, समझने, याद रखने, ध्यान केंद्रित करने और समस्याओं को हल करने जैसी मानसिक प्रक्रियाओं से संबंधित कार्य में होने वाली गिरावट और अल्जाइमर जैसी न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों से महत्वपूर्ण सुरक्षा मिलती है।

योग के ज़रिए तनाव को कम किया जा सकता है
लंबे समय तक तनाव में रहना दिमाग के स्वास्थ्य के लिए बहुत ही खतरनाक होता है। तनाव की लंबी अवधि हिप्पोकैम्पस के सिकुड़ने का कारण बन सकती है, यह याददाश्त और भावनात्मक विनियमन के लिए ब्रेन सेंटर है। योग शारीरिक मुद्राओं को सचेत श्वास और ध्यान के साथ जोड़कर एक एंटीटोड प्रदान करता है, जिससे तनाव में उल्लेखनीय कमी आती है और भावनात्मक संतुलन को बढ़ावा मिलता है।

साइकोन्यूरोएंडोक्रिनोलॉजी (2021) में एक अध्ययन ने प्रदर्शित किया कि योग करने वालों ने कम कोर्टिसोल स्तर, बेहतर मूड और भावनात्मक विनियमन का अनुभव किया। तनाव सोचने, समझने, याद रखने, ध्यान केंद्रित करने और समस्याओं को हल करने जैसी मानसिक प्रक्रियाओं से संबंधित कार्यों में गिरावट को तेज़ कर सकता है, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ा सकता है और मस्तिष्क के कार्य को खराब कर सकता है, इन हानिकारक प्रभावों का मुकाबला करने में योग की भूमिका को इस निष्कर्ष में उजागर किया गया है।

योग में माइंडफुलनेस की शक्ति
माइंडफुलनेस यानी वर्तमान क्षण में बिना किसी निर्णय के, अपनी भावनाओं, विचारों और शारीरिक संवेदनाओं के प्रति सजग रहना योग का एक मुख्य तत्व है। शोध से संकेत मिलता है कि माइंडफुलनेस अभ्यास ध्यान, आत्म-नियमन और भावनात्मक बुद्धिमत्ता को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ा सकते हैं। यह विशेष रूप से चिंता, निराशा और पीटीएसडी जैसी मानसिक स्वास्थ्य तकलीफों से जूझ रहे व्यक्तियों के लिए फायदेमंद है।

जर्नल ऑफ क्लिनिकल साइकोलॉजी (2020) ने पाया कि माइंडफुलनेस पर आधारित योग ने सामान्यीकृत चिंता विकार वाले प्रतिभागियों में चिंता और निराशा के लक्षणों को कम करने में मदद की। मानसिक शांति को बढ़ावा देने और भावनाओं को नियंत्रित करने की दिमाग की क्षमता को मज़बूत करने से, योग स्थिरता और कल्याण की भावना को बढ़ावा देता है।

योग ब्रेन पर किए जाने वाले पारंपरिक उपचारों का समर्थन करता है
ब्रेन के स्वास्थ्य का समर्थन करने के लिए योग एक अमूल्य उपकरण है, इसे पारंपरिक मेडिकल देखभाल के रूप में नहीं, बल्कि पूरक उपचार के रूप में देखा जाना चाहिए। ब्रेन की सर्जरी या न्यूरोलॉजिकल स्थितियों से उबरने वाले व्यक्तियों के लिए, योग संज्ञानात्मक रिकवरी में सहायता कर सकता है, भावनात्मक स्थिरता में सुधार कर सकता है और तनाव को कम कर सकता है। योग कुल रिकवरी योजना का एक आवश्यक घटक है।

भारत में, जहाँ न्यूरोलॉजिकल बीमारियां बढ़ रही हैं, योग को उपचार प्रोटोकॉल में शामिल करने से रिकवरी के परिणाम बेहतर हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, ब्रेन की सर्जरी से उबरने वाले व्यक्ति संज्ञानात्मक कार्य को बेहतर बनाने, तनाव को कम करने और भावनात्मक कल्याण को बढ़ावा देने की योग की क्षमता से लाभ उठा सकते हैं। ये लाभ देश के स्वास्थ्य सेवा बुनियादी ढांचे के संदर्भ में विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं, जो हमेशा व्यापक रिहैबिलिटेशन सेवाएं प्रदान करने के लिए सुसज्जित नहीं हो सकते हैं।

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