उलदा की पहाड़ियों पर बैठीं वैष्णो देवी,भरती हैं भक्तों की झोलियां
सक्ती-सक्ति से खरसिया राष्ट्रीय राजमार्ग-49 पर ग्राम-उलदा के समीप विराजी मां वैष्णो देवी की आराधना के लिए चैत्र शुक्ल सप्तमी शुक्रवार को 351 मनोकामना कलश के साथ क्षेत्रवासियों ने मां की विशेष आराधना की,ज्ञात हो कि सतपुड़ा की पहाड़ियों के बीच रायगढ़ जिले के तहसील मुख्यालय खरसिया से बारह किलामीटर की दूरी पर बोतल्दा की पहाड़ी पर ग्राम उल्दा में माँ वैष्णो देवी का हूबहू वैसा ही मंदिर है, जैसा जम्मू-कटरा में माता का प्रसिद्ध शक्तिपीठ है,पहाड़ी में माँ वैष्णो देवी का मंदिर और पास ही बहता प्राकृतिक झरना बरबस ही भक्तों को अपनी ओर खींच ले आता है

नवरात्रि में ग्रामीण अंचल से ही नहीं वरन दूर दूर से लोग इस मनोरम स्थान पर माता के दर्शनों हेतु आते हैं,कहते है कि जो भक्त अपनी फरियाद लेकर कटरा तक नहीं जा पाते, माता ने उनके लिए छत्तीसगढ़ में अपना दरबार बनाया हैै। ग्राम उल्दा में पहाड़ों पर बैठी माता वैष्णवदेवी अपने दर पर आए हर भक्त की झोलियां भरती हैं। नवरात्रों में यहां 9 दिनों तक मेला सा लगता है, तो अटूट लंगर भी लगा रहता है।

गुफाओं में हैं ऐतिहासिक शैल चित्र
वहीं नजदीकी ही ग्राम बरगढ़ में अंचल का प्रसिद्ध शिवालय सिद्धेश्वर धाम है, तो सूती-घाट के नजदीक ग्राम पतरापाली-उल्दा की पहाड़ियों में भंवरखोल नामक प्रसिध्द शैलाश्रय है, जिसकी दीवारों पर मत्स्य-कन्या, जंगली भैंसा, भालू , मानव हथेली और भारतीय संस्कृति के शुभंकर ‘स्वास्तिक’ चिन्ह भी अंकित हैं। वहीं बोतल्दा की गुफा में भी आकर्षक शैलचित्र जो हैं, जो प्रागैतिहासिक हैं।
