107 वर्षीय दादी ने पेश की अनोखी मिसाल! मौत को मात देकर लौटी घर

भोपाल: अक्सर कहा जाता है कि ‘अगर जीने की उम्मीद हो तो मौत भी हार जाती है।’ ऐसा ही एक वाक्या मध्य प्रदेश में देखने को मिला, जहां राज्य की रहने वाली 107 वर्षीय महिला को एक हफ्ते में 2 बार दिल का दौरा पड़ा, मगर उन्होंने जीने की उम्मीद नहीं छोड़ी तथा इसी उम्मीद के दम पर मारेंगो सिम्स हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने महिला की सफल एंजियोप्लास्टी की। यह सर्जरी डॉ. केयूर पारिख की टीम ने की।

दरअसल, मध्य प्रदेश की महिला को हार्ट अटैक आने के बाद अहमदाबाद के मारेंगो सिम्स हॉस्पिटल ले जाया गया था। वहां जब महिला की एंजियोग्राफी की गई तो पता लगा कि महिला के दिल की धमनियों में 99 प्रतिशत तक रुकावट है। महिला की गंभीर स्थिति एवं उनकी आयु चिकित्सकों के सामने चुनौती बनकर खड़े हुए थे। मगर डॉ पारिख की टीम ने सफलतापूर्वक महिला के हार्ट की सर्जरी की। सर्जरी को लेकर अस्पताल के अफसरों ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि उन्होंने दुनिया की सबसे बूढ़ी महिला की नॉर्मल सर्जरी के साथ ही रिकॉर्ड बनाया है।

वही इस सर्जरी को करने वाली टीम को लीड करने वाले डॉ पारेख ने कहा, ‘हमने हजारों एंजियोप्लास्टी की हैं। हमारा एक्सपीरियंस हमारे काम आया तथा हमने जीरो एरर के साथ इलाज को केवल 15 मिनट में पूरा किया।’ महिला के परिवार के एक शख्स ने कहा, ‘हम चाहते हैं कि हमारी दादी हजारों वर्ष जिएं। इस अस्पताल में हमारे दादाजी का भी ऑपरेशन किया गया था। हमने अपनी आंखों से उनकी स्थिति में तेजी से सुधार देखा था। इसलिए हम अपनी दादी को भी यहीं लेकर आए। हमें भरोसा था कि हमारी दादी जल्द स्वस्थ हो जाएंगी।’

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